नेदरलैंड्स और बेल्जियम में 15 अगस्त से शुरू होने वाले FIH पुरुष हॉकी विश्व कप में भारत का कोई भी अंपायर या टेक्निकल अधिकारी शामिल नहीं होगा.1998 में यूट्रेक्ट में हुए विश्व कप के बाद यह पहली बार है जब टूर्नामेंट के लिए किसी भारतीय अधिकारी को नहीं चुना गया है.पैनल में शामिल ज़्यादातर अधिकारी यूरोप से हैं.
पिछड़ रहा है भारत
वहीं कई ओलिंपिक और वर्ल्ड कप में अंपायरिंग कर चुके सतिंदर शर्मा का कहना है कि बावा सर, भुल्लर सर के बाद उन्होंने और रघु ने यह सिलसिला कायम रखा था.उन्होंने यूरोपीयों के बीच जाकर अपनी पहचान बनाई थी जो आसान नहीं था.उन्होंने कहा किबीजिंग ओलिंपिक 2008 में टीम क्वालीफाई नहीं कर सकी थी लेकिन वह अकेले अधिकारी थे, जो भारतीय हॉकी का प्रतिनिधि था. चयन के लिये प्रदर्शन में निरंतरता और अनुभव काफी मायने रखता है, जहां उन्हें लगता है कि अब भारत पिछड़ रहा है.
अधिक एक्सपोजर की जरूरत
हॉकी इंडिया की वेबसाइट पर मई 2025 में अपडेट की गई सूची के अनुसार अंपायरों की चार कैटेगरी कोर लीडिंग पैनल, लीडिंग पैनल, हाई पोटेंशियल और नेशनल अंपायर हैं, जिनमें मैंस कैटेगरी में 100 से अधिक और वुमेंस कैटेगरी में 70 से अधिक नाम दर्ज हैं. मैंस कैटेगरी में छह एफआईएच पैनल के अंपायर हैं जिनमें से रघुप्रसाद पिछले साल रिटायर हो चुके हैं. वहीं महिला वर्ग में एफआईएच पैनल की चार अंपायर हैं.तकनीकी अधिकारियों में महिला वर्ग में इन्हीं चार श्रेणियों में 50 से अधिक नाम हैं लेकिन एफआईएच पैनल में सिर्फ दो अधिकारी रोहिणी बोपन्ना और सोनिया बाथला हैं. पुरूष वर्ग में करीब 70 नाम हैं लेकिन एफआईएच पैनल के चार ही अधिकारी इसमें शामिल हैं. शर्मा ने कहा कि संख्या की बजाय गुणवत्ता पर फोकस करना जरूरी है और इसके लिये अंपायरों को अधिक एक्सपोजर देना होगा.




