हॉकी वर्ल्ड कप 2026 नेदरलैंड्स और बेल्जियम में 15 अगस्त से खेला जाना है. इस बार महिला व पुरुष वर्ल्ड कप साथ में ही हो रहे हैं. बेल्जियम के बेलफियस हॉकी एरीना और नेदरलैंड्स के वेगनर हॉकी स्टेडियम, एम्सटेलवीन में मुकाबले होने हैं. इन मैदानों में टर्फ बाकी जगहों से अलग है. यहां पर पॉलीग्रास टर्फ बिछाई गई है. यह कदम हाल ही में उठाया गया है.
पॉलीग्रास टर्फ पॉलीटेन नाम की कंपनी ने तैयार किया है. यह सिंथेटिक कार्बन जीरो हॉकी टर्फ है जो गन्ने से बना है. इसमें 80 फीसदी गन्ना आधारित उत्पाद है. यह पानी सोख लेता है और बाकी टर्फ की तुलना में इसे बहुत कम पानी चाहिए होता है. इसके बावजूद भी सतह में रफ्तार रहती है जिससे तेज हॉकी खेली जा सकती है.
पॉलीग्रास टर्फ स्वाभाविक तौर पर सिंथेटिक होता है जिससे इसमें बहुत कम बदलाव आता है. इस पर लगातार एक जैसी स्थिति रहती है. इससे खिलाड़ियों को भी मदद मिलती है. खिलाड़ी एक बार इसके हालात के हिसाब से ढल जाते हैं तो फिर उन्हें बदलाव करने की जरूरत नहीं होती है.
पॉलीग्रास टर्फ क्या पहले भी हुआ है इस्तेमाल
पॉलीग्रास टर्फ का इस्तेमाल पहले भी हुआ है. इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन ने इसे मंजूरी दे रखी है. 2018, 2022 व 2023 हॉकी वर्ल्ड कप में भी यही टर्फ थी. इसके साथ ही टोक्यो व पेरिस ओलिंपिक में भी हॉकी मुकाबले इसी टर्फ पर खेले गए थे. पेरिस ओलिंपिक में पॉलीग्रास पेरिस जीटी जीरो टर्फ इस्तेमाल हुआ था. वह दुनिया का पहला कार्बन जीरो हॉकी टर्फ था. 2026 एडिशन 10वां मौका होगा जब पॉलीग्रास टर्फ को वर्ल्ड कप के लिए चुना गया है.




