भारत के लिए सबसे तेज गोल दागने वाले ख‍िलाड़ी ने 31 की उम्र में छोड़ा खेल, जीत चुके हैं दो ओलिंपिक मेडल

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गुरजंत सिंह 2020 और पेरिस 2024 में ओलिंपिक मेडल जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे. (PC: Getty)
गुरजंत सिंह 2020 और पेरिस 2024 में ओलिंपिक मेडल जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे. (PC: Getty)

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गुरजंत सिंह 2020 और पेरिस 2024 में ओलिंपिक मेडल जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे.

उन्होंने भारत के लिए 130 सीनियर इंटरनेशनल मैच खेले और 33 गोल किए.

दो बार के ओलिंप‍िक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट गुरजंत सिंह ने नई दिल्ली में हॉकी इंडिया अवॉर्ड्स के दौरान इंटरनेशनल हॉकी से संन्यास की घोषणा कर दी. उन्होंने कहा कि पिछले साल पीठ की चोट के कारण नेशनल टीम में अपनी जगह गंवाने के बाद अब इस खेल को अलव‍िदा कहने  का सही समय आ गया है.  31 साल के स्ट्राइकर ने 130 सीनियर इंटरनेशनल मैच खेले और 33 गोल किए. साथ ही उन्होंने लखनऊ में बेल्जियम के खिलाफ 2016 जूनियर विश्व कप जीतने वाली टीम के फाइनल में पहला गोल भी किया था.

गुरजंत का कर‍ियर

गुरजंत ने ने अपने बड़े भाई को देखकर हॉकी खेलना शुरू किया था, जो नेशनल लेवल पर खेलते थे. ओलिंपिक टीम में उनके परिवार के सदस्य भी हैं और उन्होंने अपने कजिन भाई सिमरनजीत के साथ मिलकर जर्मनी के खिलाफ भारत के बराबरी वाले तीसरे गोल में असिस्ट किया था. अमृतसर के खैलारा में जन्मे गुरजंत ने जूनियर स्तर पर तेजी से आगे बढ़े और अपने खेल से सबका ध्यान खींचा. 2016 में लखनऊ में हुए जूनियर विश्व कप में जीत दिलाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई.

फाइनल में गोल करके गोल्ड मेडल पक्का करने के बाद उन्होंने 2017 में सीनियर इंटरनेशनल लेवल पर डेब्यू किया और भारतीय आक्रमण पंक्ति के एक मुख्य खिलाड़ी बन गए. 2021 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया. अपने रिटायरमेंट की घोषणा करते हुए गुरजंत सिंह ने कहा कि पिछले साल जून में प्रो लीग के बाद से, पीठ की चोट के कारण मुझे सीनियर टीम से बाहर बैठना पड़ा. मैं लगभग 7-8 महीने तक हॉकी से दूर रहा. 

हमेशा एक अनमोल याद 


उन्होंने आगे कहा कि वह गर्व और गहरी भावनाओं के साथ अपने रिटायरमेंट की घोषणा करते हैं. उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने अपना हॉकी का सफर अवॉर्ड फंक्शन में बैठे सीनियर खिलाड़ियों को देखकर शुरू की थी और उनके साथ भारत के लिए खेलने का अपना सपना पूरा करना, उनके लिए हमेशा एक अनमोल याद रहेगी.