'क्या किसी को परवाह है?' वर्ल्ड कप में टीम के खराब प्रदर्शन के बाद हॉकी इंडिया से मांगा गया जवाब

SportsTak

SportsTak

अपडेटेड:

google-icon
भारत की मैंस और वीमेंस दोनों टीमें वर्ल्ड कप से जल्दी बाहर हो गई. (pc: getty)
भारत की मैंस और वीमेंस दोनों टीमें वर्ल्ड कप से जल्दी बाहर हो गई. (pc: getty)

Story Highlights:

भारत की मैंस और वीमेंस दोनों टीमें वर्ल्ड कप से जल्दी बाहर हो गई.

मैंस टीम का प्रदर्शन वर्ल्ड कप में काफी न‍िराशजनक रहा.

हॉकी वर्ल्ड कप में भारत की मैंस और वीमेंस दोनों टीम का सफर खत्म हो गया. टीम के खराब प्रदर्शन के बाद पूर्व गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने एक इमोशनल पोस्ट में हॉकी इंडिया की आलोचना की और जवाबदेही की मांग की. भारत की दोनों टीमें सेमीफाइनल से पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो गईं. इसका मतलब है कि दोनों ही टीमें 50 से ज़्यादा सालों से अंतिम चार (सेमीफाइनल) के दौर तक नहीं पहुंच पाई हैं. दोनों टीमों की वर्ल्ड कप की तैयारियों पर काफी चर्चा हुई, क्योंकि जर्सी का रंग बदलने को लेकर हुई बहस सुर्खियों में छाई रही. इसके बाद ऐसी खबरें भी आईं कि महिला टीम के कोच श्योर्ड मारिजने वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले टीम से दूर थे और उन्होंने लंबा ब्रेक लिया था. 

वर्ल्ड कप से कोई फ़र्क नहीं पड़ता


उन्होंने अधिकारियों से यह भी सवाल किया कि वर्ल्ड कप से ठीक पहले मारिजने को छुट्टी क्यों दी गई. उन्होंने पूछा कि क्या टीम अच्छा प्रदर्शन कर पाएगी जब हेड कोच छुट्टी पर हों. चिंता मत करो, वर्ल्ड कप से कोई फ़र्क नहीं पड़ता.एशियन गेम्स आने वाले हैं. वहां मेडल जीतो और फिर हम LA 2028 के बारे में सपना देखना शुरू कर सकते हैं. श्रीजेश ने आगे लिखा कि जाहिर है कि वर्ल्ड कप में जो कुछ भी गलत हुआ, उसे छिपाने के लिए इतना ही काफ़ी है.  श्रीजेश ने कहा कि वर्ल्ड कप से ठीक पहले महिला टीम के मुख्य कोच छुट्टी पर थे, फिर भी लड़कियां पूरे जोश के साथ खेली और उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया. इसका श्रेय खिलाड़ियों को जाता है, लेकिन जवाबदेही किसकी है? क्या हम सच में उम्मीद कर सकते हैं कि तैयारी के आखिरी दौर में जब मुख्य कोच मौजूद न हों, तब भी टीम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करे? 


श्रीजेश का सवाल 

पुरुष टीम की बात आने पर जूनियर टीम के पूर्व कोच ने कोई कसर नहीं छोड़ी. उन्होंने भारतीय हॉकी में आ रहे औसत दर्जे के खेल पर सवाल उठाए और पूछा कि क्या वे सच में ऐसी टीम बना रहे हैं जो दुनिया की सबसे अच्छी टीमों को हरा सके.पुरुष टीम किसी बड़ी टीम से हारती है तो कहा जाता है कि यह सीखने का अनुभव है.किसी एशियाई टीम को हराती है तो शानदार जीत.अच्छा खेलती है तो अच्छा प्रदर्शन,लेकिन एक मुश्किल सवाल यह है कि क्या हम सिर्फ़ अच्छा हॉकी खेलने वाली टीम बना रहे हैं या ऐसी टीम जो दुनिया की सबसे अच्छी टीमों को हराने का दम रखती हो.सीखने', अच्छी हॉकी और भविष्य के टूर्नामेंट्स की आड़ लेना बंद करें. वर्ल्ड कप कोई रिहर्सल नहीं है. यह वर्ल्ड कप है. उन्होंने आगे कहा कि तो मुश्किल सवाल कौन पूछेगा? जवाबदेही की मांग कौन करेगा? और सबसे ज़रूरी बात, क्या किसी को सच में इसकी परवाह है?