कबड्डी... मिट्टी से जुड़ा खेल, नसों में बहता रोमांच, गांव और शहरों के बीच की खाई भरने की गजब कहानी

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कबड्डी... मिट्टी से जुड़ा खेल, नसों में बहता रोमांच, गांव और शहरों के बीच की खाई भरने की गजब कहानी

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प्रो कबड्डी लीग (PKL) भारत में क्रिकेट के बाद दूसरा सबसे ज्यादा देखा जाने वाला खेल आयोजन बन गया. 

प्रो कबड्डी लीग (PKL) का पांचवां सीजन आते-आते टीमों की संख्या 8 से बढ़ाकर 12 कर दी गई जो बताता है कि इस लीग को दर्शकों ने भरपूर प्यार दिया.

कबड्डी, कबड्डी, कबड्डी... ऊपर-नीचे होती खिलाड़ियों की सांसों को चीरकर जब ये आवाज बाहर आती है तो देखने वालों की पलकें झपकना तक भूल जाती हैं. बाज की नजर और चीते सी फुर्ती के साथ जब ये खिलाड़ी अंकों की अपनी खोज पूरी कर लेते हैं तो उनके चेहरे के भाव ऐसे होते हैं जैसे बाहुबली ने माहिष्मति साम्राज्य को दुश्मनों से बचा लिया हो. मिट्टी से जुड़ा, मिट्टी में बढ़ा ये खेल लोगों के लिए सिर्फ मनोरंजन का जरिया भर नहीं है बल्कि इसका रोमांच उनकी नसों में बहता है. 

कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना...

 

प्रो कबड्डी लीग (PKL) का ये रोमांचक सफर तब शुरू हुआ जब डिज्नीस्टार ने कबड्डी के मीडिया अधिकार खरीद लिए. जिन लोगों को कबड्डी के विस्तार पर विश्वास नहीं था उन्होंने इस निवेश पर सवाल भी उठाए. लेकिन स्टार स्पोर्टस को अपने विजन और इस खेल पर पूरा भरोसा था. ये बात समझना मुश्किल नहीं था कि कबड्डी की अनछुई क्षमता, उसका तेज तर्रार स्वरूप प्राइमटाइम टेलीविजन के लिए एकदम मुफीद रहेगा. लक्ष्य साफ था, वो ये कि जैसे इंडियन प्रीमियर लीग ने क्रिकेट को नए आयाम दिए, उसी तरह पीकेएल भी कबड्डी को प्रोफेशनल स्तर तक पहुंचाएगा. जल्द ही अपनी समृद्ध सांस्कृतिक प्रासंगिकता के साथ कबड्डी अगली पीढ़ी के दिल में जगह बनाने के लिए तैयार थी और गांवों-शहरों के बीच बनी खाई को पाटने के लिए भी. 

भारत में क्रिकेट के बाद दूसरा सबसे ज्यादा देखा जाने वाला खेल बना

 

30 सेकंड की रेड, डू और डाई रेड जैसे नए नियम, कई कैमरा एंगल और रीयल टाइम रीप्ले जैसी सुविधाओं के चलते पीकेएल का पहला सीजन मील का पत्थर साबित हुआ. ये पहली बार था जब इस खेल में खिलाड़ियों की पहचान वैश्विक स्तर पर बननी शुरू हुई और इस चकाचौंध के बाद कबड्डी का हर घर तक पहुंचना भी तय हो गया. इस बात पर मुहर इस फैक्ट ने लगाई कि जल्द ही प्रो कबड्डी लीग (PKL) भारत में क्रिकेट के बाद दूसरा सबसे ज्यादा देखा जाने वाला खेल आयोजन बन गया. 

घर-घर तक पहुंचे कबड्डी के रोलमॉडल

 

प्रो कबड्डी लीग (PKL) ने इस पड़ाव में एक और महत्वपूर्ण काम किया. वो था गांव और शहरों के युवा और उभरते खिलाड़ियों को अपनी चमक बिखेरने के लिए एक ऐसा मंच देने का जहां से वो दुनियाभर में अपनी पहचान बना सकते थे. उन्होंने पहचान बनाई भी. इसी का नतीजा रहा कि प्रदीप नरवाल, राहुल चौधरी और अजय ठाकुर जैसे खिलाड़ी घर-घर में मशहूर हो गए. लोग उन्हें अपना रोल मॉडल मानने लगे. प्रो कबड्डी लीग (PKL) का पांचवां सीजन आते-आते टीमों की संख्या 8 से बढ़ाकर 12 कर दी गई जो बताता है कि इस लीग को दर्शकों ने भरपूर प्यार दिया. गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु ने तो अपने मजबूत फैनबेस भी स्थापित कर लिए. 

साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले खिलाड़ी बने स्टार

 

प्रो कबड्डी लीग (PKL) का कबड्डी खिलाड़ियों पर भी काफी गहरा प्रभाव पड़ा है. साधारण पृष्ठभूमियों से आने वाले ये खिलाड़ी अब स्टार बन चुके हैं. प्रो कबड्डी लीग (PKL) के बाद कबड्डी में पेशेवर करियर बनाने वाले खिलाड़ियों की संख्या में बेशुमार बढ़ोतरी हुई है. आज कबड्डी ने ग्रामीण खेल आयोजन से आगे बढ़कर वैश्विक दर्जा हासिल कर लिया है जिसने एथलीटोंऔर प्रशंसकों की एक नई पीढ़ी को प्रेरित किया है. अपनी असाधारण यात्रा के साथ प्रो कबड्डी लीग (PKL) देश की सबसे सफल लीगों में से एक के रूप में अपनी जगह मजबूत कर रही है. उम्मीद है साल दर साल कबड्डी और उसके रोमांच का ये सफर अपनी हर मंजिल को हासिल करता रहेगा.