भारत का क्या है मिशन ओलिंपिक 2036, किन देशों से है टक्कर, कैसी है तैयारी, कितना आएगा खर्चा

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भारत 2036 ओलिंपिक की मेजबानी चाहता है.
भारत 2036 ओलिंपिक की मेजबानी चाहता है.

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आगामी ओलिंपिक 2028 में अमेरिका के लॉस एंजिलिस शहर में होना है.

भारत गुजरात के अहमदाबाद में ओलिंपिक कराना चाहता है.

भारत 2036 ओलिंपिक की मेजबानी करना चाहता है. अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति (IOC) ने 6 अक्टूबर को इसकी पुष्टि की. भारत और गुजरात पिछले कुछ सालों से लगातार कह रहे थे कि अहमदाबाद में 2036 ओलिंपिक कराने की योजना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई मौकों पर इसका जिक्र किया था. इसके लिए लगातार काम भी किए जा रहे थे. गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सिंघवी के नेतृत्व में एक कमिटी भी बनाई गई है जो ओलिंपिक मेजबानी से जुड़े कामों को देख रही है. भारत ने इस दिशा में आगे बढ़ते हुए 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भी हासिल की. उसकी योजना एशियन गेम्स कराने की भी है लेकिन उसकी मेजबान 2036 के बाद की ही मिल पाएगी. लेकिन ओलिंपिक मेजबानी आसान नहीं है. भारत के अलावा भी कई देश इसके लिए कोशिश कर रहे हैं. 

भारत को ओलिंपिक मेजबानी में किससे मिल रही चुनौती

IOC ने बताया कि सात देश 2036 ओलिंपिक की मेजबानी के इच्छुक हैं. इनमें भारत के अलावा कतर, जर्मनी, तुर्किए, साउथ कोरिया, हंगरी और साउथ अफ्रीका शामिल है. इनमें से जर्मनी और साउथ कोरिया में पहले भी ओलिंपिक हो चुके हैं. कतर व साउथ अफ्रीका फीफा वर्ल्ड कप की मेजबानी कर चुके हैं. भारत ने एशियन गेम्स दो बार और कॉमनवेल्थ गेम्स की एक बार मेजबानी की है. मगर कभी भी ओलिंपिक या फीफा वर्ल्ड कप जैसे ग्लोबल इवेंट की मेजबानी नहीं की है. भारत ने 2024 में ओलिंपिक मेजबानी के लिए अपना आवेदन दिया था.

तुर्किए ने अभी तक पांच बार ओलिंपिक मेजबानी का दावा पेश किया है लेकिन सफलता नहीं मिली. अफ्रीका महाद्वीप से साउथ अफ्रीका ओलिंपिक कराने वाला पहला देश बनना चाहता है. हंगरी ने 2024 ओलिंपिक कराने का दावा पेश किया था लेकिन वह फ्रांस से पिछड़ गया था. जर्मनी एक बार फिर से म्यूनिख में ओलिंपिक कराना चाहता है. वह 1972 में भी इस शहर में ओलिंपिक करा चुका है.

ओलिंपिक मेजबानी पर कब तक होगा फैसला

IOC ने बताया कि सभी इच्छुक देशों से नवंबर में अपनी प्रजेंटेशन देने को कहा गया है. मेजबानी की दावेदारी को कई तकनीकी पहलुओं पर परखा जाएगा. इनमें वेन्यू मास्टर प्लान, खिलाड़ियों का अनुभव, फंडिंग, राजनीतिक व लोगों का समर्थन जैसी चीजें शामिल हैं. समझा जाता है कि 2029 के मध्य में 2036 ओलिंपिक की मेजबानी पर फैसला होना है. भारतीय ओलिंपिक महासंघ, गुजरात सरकार व केंद्रीय खेल मंत्रालय के साथ मिलकर दावेदारी पेश करेंगे. नवंबर 2026 में प्रजेंटेशन के बाद रणनीतिक संवाद का दौर चलेगा. मेजबानी देने का आखिरी चरण 2028 में शुरू होगा. इस दौरान IOC के सदस्यों को भविष्य मेजबानी आयोग की तरफ से रिपोर्ट दी जाएगी. फिर IOC एग्जीक्यूटिव बोर्ड दावेदारों की छंटनी करते हुए वोटिंग कराएगा और इसके जरिए मेजबानी दी जाएगी.

ओलिंपिक मेजबानी पर कितना खर्च आएगा

ओलिंपिक की मेजबानी सस्ता सौदा नहीं है. इस पर मोटी रकम खर्च होती है. बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की जरूरत रहती है. साथ ही जिस शहर में ये खेल होते हैं वहां की बुनियादी सुविधाओं को सुधारना होता है. एक रिपोर्ट में सामने आया कि अहमदाबाद में ओलिंपिक कराने पर 34 से 60 हजार करोड़ रुपये का खर्चा आ सकता है.

भारत को ओलिंपिक मेजबानी मिलने में क्या हो सकती है दिक्कतें

IOC ने कुछ समय पहले भारत से कहा था कि ओलिंपिक मेजबानी की चाह रखते हुए उसे अपने सिस्टम को दुरुस्त करने की जरूरत है. इसके तहत डोपिंग पर नियंत्रण, खेल प्राधिकरणों का सही संचालन करना जरूरी है. अगर इनमें सुधार नहीं होता है तब दावेदारी पर विपरीत असर पड़ता है. इस बीच ओलिंपिक मेजबानी फायदे का सौदा नहीं रहा है. पिछले कुछ दशकों में देखा गया है कि जिन भी देशों ने ओलिंपिक मेजबानी की है उन पर राजस्व का दबाव बढ़ा है. जो स्टेडियम या सुविधाएं तैयार की गईं वे बाद में खाली रहती है. 

अभी ओलिंपिक मेजबानी किसके पास है

आगामी ओलिंपिक 2028 में अमेरिका के लॉस एंजिलिस शहर में होना है. इसके बाद 2032 ओलिंपिक की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन शहर के पास है.

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