पंजाब आज केवल विकास की बात नहीं कर रहा, बल्कि एक ऐसी पीढ़ी तैयार कर रहा है जो पढ़ी-लिखी, स्वस्थ और आत्मविश्वासी हो. राज्य सरकार ने यह समझ लिया है कि अगर किसी समाज को मजबूत बनाना है, तो उसकी नींव बच्चों और युवाओं पर रखनी होगी. इसी सोच से पंजाब में शिक्षा, खेल और स्वास्थ्य - इन तीनों क्षेत्रों पर एक साथ बड़े स्तर पर काम किया गया है. ये तीनों मिलकर पंजाब की आने वाली पीढ़ी को एक नई दिशा दे रहे हैं.
स्कूल ऑफ एमिनेंस, प्रशिक्षित शिक्षक, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल बोर्ड, मुफ्त किताबें और यूनिफॉर्म - इन सबने मिलकर सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल दी है. अब गांव का बच्चा भी यह महसूस करता है कि उसके सपने किसी से छोटे नहीं हैं.
खेल: मैदानों से निकल रही है नशे के खिलाफ लड़ाई
पंजाब में खेल सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा हैं. सरकार ने खेलों को नशे के खिलाफ सबसे मजबूत हथियार बनाया है. ‘खेड़ां वतन पंजाब दियां’ के जरिए गांव-गांव खेल संस्कृति को फिर से जिंदा किया गया है. सरकार 13,000 आधुनिक स्टेडियम बना रही है, ताकि हर बच्चे को खेलने की जगह मिले. खेलों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले युवाओं को सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता भी दी जा रही है. खेल युवाओं को अनुशासन, आत्मविश्वास और लक्ष्य देता है. यही उन्हें गलत रास्तों से दूर रखता है.
स्वास्थ्य: आम आदमी क्लिनिक से हर परिवार को सुरक्षा
एक स्वस्थ शरीर ही अच्छी पढ़ाई और खेल की नींव होता है. इसी वजह से पंजाब में आम आदमी क्लिनिक खोले गए. आज गांवों और शहरों में सैकड़ों आम आदमी क्लिनिक काम कर रहे हैं, जहां डॉक्टर की सलाह, दवाइयां, जांच, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, सब कुछ मुफ्त मिलता है. अब गरीब परिवारों को बीमारी में कर्ज नहीं लेना पड़ता. इलाज घर के पास मिल जाता है.

