खेल हमेशा से पंजाब की पहचान रहे हैं. इस मिट्टी ने देश को ओलिंपिक विजेता, हॉकी के दिग्गज, कुश्ती के चैंपियन और एथलेटिक्स के सितारे दिए हैं. लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब खेलों को वह समर्थन नहीं मिल पाया, जिसकी वजह से कई प्रतिभाएं दबकर रह गईं. इसी खालीपन को भरने के लिए पंजाब सरकार ने एक नई खेल नीति और व्यापक खेल आंदोलन शुरू किया, ताकि हर गांव, हर कस्बे और हर बच्चे को खेलने का मौका मिल सके. आज पंजाब में खेल सिर्फ शौक नहीं, बल्कि करियर और पहचान का रास्ता बन रहे हैं.
‘खेड़ां वतन पंजाब दियां’: गांव-गांव तक खेल
पंजाब सरकार ने खेल को जनता से जोड़ने के लिए ‘खेड़ां वतन पंजाब दियां’ प्रतियोगिताएं शुरू कीं. यह सिर्फ टूर्नामेंट नहीं, बल्कि पूरे राज्य में खेल का महोत्सव बन गया है. अब तक इसके कई सत्र आयोजित हो चुके हैं, जिनमें- हजारों गांवों और स्कूलों के खिलाड़ी, कबड्डी, हॉकी, फुटबॉल, एथलेटिक्स, कुश्ती और कई खेलों में हिस्सा ले चुके हैं. सरकार ने विजेताओं को करोड़ों रुपये की इनामी राशि देकर यह संदेश दिया है कि मेहनत और प्रतिभा की कद्र होगी. एक युवा खिलाड़ी ने कहा, “पहले हम खेलते थे, लेकिन भविष्य को लेकर डर था. अब सरकार हमें आगे बढ़ने का भरोसा देती है.”
खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी: खेल को मिला सम्मान
पंजाब सरकार ने सैकड़ों खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी है. इससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा, सामाजिक सम्मान और खेल जारी रखने की आज़ादी मिली है. एक खिलाड़ी ने कहा, “अब मेरे माता-पिता को चिंता नहीं रहती. मैं खेल पर पूरा ध्यान दे सकता हूं.”
ट्रेनिंग और डाइट के लिए आर्थिक सहायता
सरकार खिलाड़ियों को कोचिंग, डाइट, स्पोर्ट्स इक्विपमेंट, टूर्नामेंट यात्रा के लिए आर्थिक सहायता देती है, जिससे गरीब और ग्रामीण बच्चे भी आगे बढ़ सकें.
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का संदेश
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जब युवा मैदान में होंगे, तो नशे में नहीं जाएंगे. खेल पंजाब को मजबूत बनाएंगे और हम हर खिलाड़ी के साथ खड़े हैं.”
पंजाब का उज्जवल भविष्य
पंजाब की यह खेल क्रांति सिर्फ मेडल नहीं, बल्कि एक स्वस्थ, आत्मविश्वासी और नशा-मुक्त पीढ़ी तैयार कर रही है. मैदानों से उठ रही यह ऊर्जा अब पूरे पंजाब को आगे बढ़ा रही है.

