पंजाब के हजारों गांवों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं रही है, लेकिन अक्सर बच्चों और युवाओं के पास पढ़ने के लिए सही जगह नहीं होती थी. शोर-शराबे वाले घर, बिजली-इंटरनेट की कमी और शहरों की दूरी पढ़ाई में बड़ी बाधा बनती थी.इस सच्चाई को समझते हुए पंजाब सरकार ने एक अनोखा और दूरदर्शी फैसला लिया, हर गांव में आधुनिक लाइब्रेरी. यह फैसला आज पंजाब के युवाओं के लिए एक नई दुनिया खोल रहा है.
कितनी लाइब्रेरियां बन चुकी हैं?
आज पंजाब में सैकड़ों गांवों में आधुनिक लाइब्रेरियां बन चुकी हैं. ये सिर्फ अलमारी और कुर्सी नहीं, बल्कि एसी या अच्छे पंखे, रोशनी, शांत माहौल, प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें से लैस अध्ययन केंद्र हैं. छोटे गांव जो कभी शहरों पर निर्भर थे, अब खुद पढ़ाई के केंद्र बन रहे हैं.
लाइब्रेरी के अंदर क्या मिलता है?
इन लाइब्रेरियों में युवाओं को सरकारी नौकरी की तैयारी की किताबें, अखबार और मैगजीन, कंप्यूटर और इंटरनेट, आरामदायक स्टडी टेबल जैसी सुविधाएं मिलती है. एक छात्र ने कहा कि अब हमें शहर नहीं जाना पड़ता.गांव में ही हम IAS और बैंक की तैयारी कर रहे हैं.
कितना खर्च किया जा रहा है?
हर लाइब्रेरी पर सरकार ने अच्छा-खासा निवेश किया है ताकि भवन अच्छा हो, किताबें अपडेट हों, बिजली और इंटरनेट मिले. यह सरकार की सोच दिखाता है कि यह कोई दिखावा नहीं, बल्कि मानव पूंजी में निवेश है.
शांत लेकिन गहरी क्रांति
पंजाब की लाइब्रेरी क्रांति कोई शोर नहीं मचाती, लेकिन हर दिन किसी न किसी गांव में किसी न किसी बच्चे का भविष्य बदल रही है. यह दिखाता है कि जब सरकार सही जगह निवेश करती है, तो समाज खुद बदलने लगता है.

