ओलिंपिक, कॉमनवेल्थ और अब 2038 एशियन गेम्स, भारत ने मेजबानी के लिए पेश किया दावा, इन देशों से है टक्कर

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ahmedabad olympics
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एशियन गेम्स की मेजबानी 2034 तक के लिए दी जा चुकी है.

2026 एशियन गेम्स जापान के आयची-नागोया में होने हैं.

भारत एशियन गेम्स भी अहमदाबाद में कराने का इच्छुक है.

भारत एशियन गेम्स 2038 की मेजबानी करना चाहता है. इसके लिए उसकी तरफ से दावेदारी पेश कर दी गई है. भारतीय ओलिंपिक संघ (IOA) ने एशिया ओलिंपिक परिषद  (OCA) को अप्रैल महीने की शुरुआत में पत्र लिखा. भारत 2036 ओलिंपिक की मेजबानी करना चाहता है और इसके लिए उसने दावेदारी मजबूती से पेश की है. साथ ही 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत ले चुका है. भारत एशियन गेम्स भी अहमदाबाद में कराने का इच्छुक है.

एशियन गेम्स की मेजबानी 2034 तक के लिए दी जा चुकी है. इस साल जापान के आयची-नागोया में ये खेल होने हैं. 2030 में कतर की राजधानी दोहा और 2034 में सऊदी अरब की राजधानी रियाद में एशियन गेम्स होने हैं. ऐसे में भारत की ओर से 2038 की दावेदारी रखी गई है. दी इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के प्रस्ताव पर 23 अप्रैल को चीन के सानया शहर में एग्जीक्यूटिव बोर्ड की बैठक में चर्चा हुई. इसमें फैसला किया गया कि एक टीम जाकर दावेदारी की जांच करेगी. रिपोर्ट में IOA के सीईओ रघुराम अय्यर ने एशियन गेम्स की मेजबानी का दावा पेश करने की पुष्टि की है.

भारत को इन देशों से मिलेगी टक्कर

 

भारत के अलावा साउथ कोरिया और मंगोलिया भी 2038 एशियन गेम्स की मेजबानी चाहते हैं. भारत ने 1951 में पहली बार हुए इन खेलों की मेजबानी की थी. 1982 में फिर से उसने ये खेल कराए. दोनों ही बार दिल्ली में आयोजन हुआ था. लेकिन इसके बाद से एशियन गेम्स भारत में नहीं हुए हैं.

2038 एशियन गेम्स हासिल करने का क्या है मकसद

 

दी इंडियन एक्सप्रेस ने एक अधिकारी के हवाले से लिखा है, अहमदाबाद में अगले तीन से चार साल में बहुत सारे वेन्यू तैयार हो जाएंगे. ये वेन्यू खेलों की संस्कृति विकसित करने के लिए तैयार किए जा रहे हैं. अगर भारत को 2036 ओलिंपिक की मेजबानी मिलती है तो एशियन गेम्स इसकी एक जबरदस्त विरासत होंगे. जिन वेन्यू को ओलिंपिक के लिए बनाया जाएगा उनका इस्तेमाल इन खेलों के लिए भी हो जाएगा. अगर किसी वजह से भारत को 2036 ओलिंपिक की मेजबानी नहीं मिलती है तब 2038 एशियन गेम्स कराने का मतलब होगा कि उस ढांचे का अच्छे से इस्तेमाल होगा और उसी दौरान देश को मेजबानी का अनुभव मिल जाएगा जिससे आगे के ओलिंपिक हासिल किए जा सकें.