'...फिर तो खेलना छोड़ देना चाहिए', सिंगापुर ओपन जीतने के बाद सात्विक-चिराग ने क्यों कहा ऐसा

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सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने सिंगापुर ओपन जीता. (Photo: Getty)
सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने सिंगापुर ओपन जीता. (Photo: Getty)

Story Highlights:

सात्विक और चिराग ने तीसरी बार सुपर 750 इवेंट जीता.

सात्विक और चिराग की जोड़ी जून 2025 में वर्ल्ड रैंकिंग में 27वें नंबर पर पहुंच गई थी.

सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की भारतीय जोड़ी ने पिछले सप्ताह सिंगापुर ओपन जीता. यह दो साल में उनकी पहली खिताबी जीत रही. उनके दो खिताब के बीच कुल 742 दिन का अंतराल रहा. सात्विक-चिराग की जोड़ी ने इंडोनेशिया के फजर अल्फियान और मोहम्मद फिकरी को 73 मिनट तक मुकाबले में 18-21, 21-17, 21-16 से मात दी. इस कामयाबी से पहले भारतीय जोड़ी लगातार अच्छा खेल रही थी लेकिन उसे खिताबी जीत नहीं मिल रही थी. ऐसे में सवाल उठने लगे थे कि क्या दोनों का खेल अब ढलान की तरफ है. सात्विक और चिराग दोनों ने लगातार अच्छा नहीं खेल पाने पर जवाब दिया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए चिराग ने कहा, 'मैं इसे अनिरंतरता नहीं कहूंगा. इसके उलट मुझे लगता है कि हम लगातार अच्छा कर रहे थे. विश्व में तीसरे नंबर की टीम को अगर अनिरंतर कहा जा रहा है तो मेरे ख्याल से नंबर एक के बाद फिर सभी खिलाड़ियों को बैडमिंटन खेलना छोड़ देना चाहिए. हां, जाहिर है, हर कोई कोर्ट में जीतने के लिए ही उतरता है. हमारे लिए भी यही बात लागू होती है, हम भी वहां जाकर खिताब जीतना चाहते थे. लेकिन ऐसा नहीं था कि हम जीत नहीं पा रहे थे और न ही ऐसा था कि हम खराब खेल रहे थे. बस शायद कभी कभी किस्मत हमारा साथ नहीं दे रही थी.'

सात्विक-चिराग की 27 से तीसरी रैंकिंग तक वापसी

सात्विक और चिराग की जोड़ी जून 2025 में वर्ल्ड रैंकिंग में 27वें नंबर पर पहुंच गई थी. तब उन्हें लंबे समय तक कोर्ट से दूर रहना पड़ा था. लेकिन नवंबर 2025 तक यह जोड़ी फिर से नंबर तीन तक पहुंच गई. चिराग ने इस तरफ ध्यान खींचते हुए कहा, 'मुझे नहीं लगता कि किसी ने यह देखा कि चोटों से वापस आने के बाद हम 27वें से तीसरे नंबर तक चले गए थे.'

सात्विक बोले- चोट बड़ी चुनौती

सात्विक ने कहा कि पिछले दो साल के सफर में चोटों ने सबसे बड़ी चुनौती खड़ी की. उन्होंने कहा, 'यह खेल का हिस्सा है. ऐसा नहीं है कि किसी को चोट नहीं लगेगी. आपको शरीर, खासकर मेरे शरीर का, आक्रामक खेल के साथ बहुत ध्यान रखना पड़ता है. कभी-कभी बड़े टूर्नामेंटों में हिस्सा नहीं ले पाएंगे, इसे भूल जाइए और सही समय पर अपना 100 फीसदी देने पर ध्यान दीजिए.'