जापान के 11 साल के यूकी कुरिहारा ने एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीत इतिहास रच दिया, लेकिन अपने से कहीं ज़्यादा उम्र के खिलाड़ियों को हराने के बाद इस युवा ई-स्पोर्ट्स खिलाड़ी ने कहा कि उन्हें शर्मिंदगी महसूस हुई और वे ज़्यादा इमोशंस नहीं दिखा पाए. प्राइमरी स्कूल के छात्र कुरिहारा और जापान के एशियन गेम्स के इतिहास में सबसे कम उम्र के एथलीट ने शनिवार को 'पुयो पुयो चैंपियंस' के फ़ाइनल में साउथ कोरिया के 24 साल के कांग डोंगशिन को 10-2 से हराया.
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अपने से ज़्यादा उम्र के खिलाड़ियों को हरा जीता गोल्ड मेडल
कुरिहारा का फाइनल तक का सफर शानदार रहा.सेमीफाइनल में उन्होंने थाईलैंड के 28 साल के तानाराक वोंगकिटकुन को 10-1 के बड़े अंतर से हराया.इस जीत से उनका कम से कम सिल्वर मेडल पक्का हो गया.फाइनल भी एकतरफा रहा.हालांकि कुरीहारा पहला गेम 1-0 से हार गए थे.इसके बाद उन्होंने खेल पर पकड़ बनाई और 10-2 से जीत हासिल की.जीत के बावजूद कुरिहारा ने बहुत ज़्यादा जश्न नहीं मनाया. उन्होंने कहा कि सच कहूं तो मुझे थोड़ी शर्मिंदगी महसूस हो रही थी, इसलिए मैं अपने भाव ज़्यादा जाहिर नहीं कर पाया या चेहरे के हाव-भाव ज़्यादा नहीं बदल पाया. उन्होंने कहा कि गोल्ड मेडल वाकई बहुत सुंदर है.पूरे मुकाबले के दौरान कुरिहारा शांत दिखे. जब उन्हें पोडियम पर गोल्ड मेडल मिला, तो उन्होंने हल्का सा सिर झुकाकर अभिवादन किया और फिर एरीना की तरफ हाथ हिलाया.
प्राइमरी स्कूल में खेलना शुरू किया पुयो पुयो
कुरिहारा ने प्राइमरी स्कूल के पहले साल में ही 'पुयो पुयो' खेलना शुरू कर दिया था. जल्द ही उन्होंने टूर्नामेंट में हिस्सा लेना और उन्हें जीतना शुरू कर दिया.उन्हें इस साल अप्रैल में प्रोफ़ेशनल लाइसेंस मिला और वे लगातार बड़े खिलाड़ियों को हराते रहे हैं. एशियन गेम्स से पहले कुरिहारा ने कहा था कि इसे स्कूल और क्रैम स्कूल के साथ मैनेज करना मुश्किल है, लेकिन इसमें बहुत मज़ा आता है. पुयो पुयो चैंपियंस एक पजल गेम है जिसमें खिलाड़ी स्क्रीन पर रंगीन ब्लॉब्स को एक लाइन में लगाकर और उन्हें गायब करके हटाते हैं.
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