Exclusive | CWG 2022 : सुशील कुमार के किस मंत्र से पिछले 8 सालों से पदक जीत रही हैं विनेश फोगाट, 'गोल्डन हैट्रिक' के बाद खोला राज

इंग्लैंड के बर्मिंघम में अतीत की नाकामी और तमाम संघर्षों को भुलाकर विनेश फोगाट ने गोल्डन हैट्रिक से वापसी की.

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इंग्लैंड के बर्मिंघम में अतीत की नाकामी और तमाम संघर्षों को भुलाकर विनेश फोगाट ने गोल्डन हैट्रिक से वापसी की. कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 (Commonwealth Games 2022) में विनेश (Vinesh Phogat) ने टोक्यो ओलिंपिक की नाकामी, अतीत के मानसिक और शारीरिक संघर्षों को पीछे छोड़कर महिलाओं के 53 किग्रा वर्ग में चंद सेकंड में ही श्रीलंका की चामोडिया केशानी मदुरावलागे डॉन को चित करके 4-0 से जीत दर्ज की. इस जीत के साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स में विनेश ने स्वर्ण पदक की हैट्रिक भी लगा डाली. जिसके बाद विनेश ने स्पोर्ट्स तक से बातचीत में अपने सफलता के उस मूल मंत्र को बताया जो साल 2014 में भारत के पूर्व ओलिंपिक मेडलिस्ट पहलवान सुशील कुमार ने उन्हें दिया था. विनेश का मानना है कि उनके दिए गए सटीक मंत्र को वह आज भी याद करके पहलवानी की मैट पर उतरती हैं और सफलता मिलती आ रही है.

 

ये रहा मंत्र 
स्पोर्ट्स तक को दिए इंटरव्यू में विनेश ने सुशील कुमार की सलाह को याद करते हुए कहा, "2014 कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद एक बार सुशील कुमार ने मुझसे एक बात कही थी. मुझे वह अब भी याद है. उन्होंने कहा था कि जब आप वार्म-अप एरिया से मैट तक वॉक करते हैं तो आपके दिमाग में क्या चल रहा होता है, यही तय करेगा कि आप जीतते हैं या हारते हैं. जब आप उस वॉक के दौरान खुद से बात करते हैं, तो आपको बस इतना सोचना होता है कि आपको जीतना है. जब मैं मैट पर गई तो मैं बस यही सोच रही थी कि मैं कैसे जीतूंगी."

 

ओलिंपिक पदक ने जीतने से थी निराश 
वहीं रियो ओलिंपिक 2016 और उसके बाद टोक्यो ओलिंपिक 2020 में तमाम कारणों के चलते पदक न चूम पाने वाली विनेश ने अपनी वापसी के बारे में कहा, "यह एक उतार-चढ़ाव भरी यात्रा रही है. कुछ एथलीट शारीरिक रूप से संघर्ष करते हैं, और कुछ मानसिक रूप से. मैंने दोनों से संघर्ष किया. लेकिन, मैंने छोटी उम्र से देखा है, मुझे दिन के अंत में परिणाम मिलते हैं लेकिन बहुत संघर्षों से गुजरने के बाद रिजल्ट मेरे पक्ष में रहे हैं. जिसके चलते अब संघर्षों से मुझे डर नहीं लगता है. ओलिंपिक जैसे मंच पर हार से उबरना मुश्किल था. मेरे अंदर आत्मविश्वास की कमी थी, आत्म-संदेह पैदा हो गया था. मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हुआ लेकिन टोक्यो ओलिंपिक के बाद मैं उस दौर से गुजरी. मुझे लगता है कि यह पदक सकारात्मक तरीके से चीजों को बदल देगा. मैं गर्व से कह सकती हूं कि मेरी कुश्ती के अगले चरण में इस खेल का आनंद लेते हुए आगे का प्लान करुंगी."
 

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