पंत को लेकर पूर्व ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने कोच द्रविड़ को चेताया, कहा- उनकी इस चीज पर...

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नई दिल्ली। भारतीय टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत को साउथ अफ्रीका के खिलाफ जोहानिसबर्ग टेस्ट में दूसरी पारी के दौरान खेले गये अपने शॉट को लेकर काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है. पंत क्रीज पर उस समय पहुंचे थे जब भारतीय टीम को एक साझेदारी की सबसे ज्यादा जरूरत थी. लेकिन शॉट लेग पर खड़े रासी वान डर दुसे के कमेंट से पंत भड़क गए और आक्रामकता के चलते अपनी तीसरी ही बॉल पर बड़ा शॉट लगाने के चक्कर में विकेटकीपर को असान सा कैच दे बैठे. जिससे चारों तरफ उनकी लापरवाही भरी शॉट को लेकर दिग्गजों ने उन्हें काफी लताड़ लगाई. हालंकि कोच राहुल द्रविड़ भी पीछे नहीं रहे और दूसरे टेस्ट मैच में 7 विकेट से हराने के बाद उन्होंने कहा था कि पंत से उनके शॉट चयन को लेकर बात करेंगे. इस पर पूर्व ऑस्ट्रेलिया स्पिनर ब्रैड हॉग ने अपनी प्रतिक्रिया दे डाली है. उनका मानना है कि पंत की समस्या तकनीक या रणनीति से कहीं अधिक गहरी है.

 

मानसिक रूप से निगेटिव नजर आ रहे हैं पंत 
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व स्पिनर हॉग ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, "पंत दबाव में अच्छे प्रदर्शन कर सकते हैं. इस युवा खिलाड़ी के साथ बातचीत का तरीका टेक्निकल से अधिक साइक्लोजिकल (मानसिक) होना चाहिए. वह इंटरटेनिंग है लेकिन बहुत निराशाजनक है या तो वो एक बड़ा स्कोर बना रहे हैं या जल्दी आउट हो रहे हैं. जौसा उन्होंने जोहनिसबर्ग टेस्ट में किया था, जब टीम को संभालने की जरूरत थी वो जल्दी आउट हो गए. यह वो ऋषभ पंत नहीं थे जिसे हम जानते हैं."

 

द्रविड़ की बात से सहमत नहीं हॉग 
हॉग ने आगे द्रविड़ के बारे में पंत को लेकर कहा, "राहुल द्रविड़ सामने आए और कहा कि वो उनके शॉट चयन को लेकर बात करने जा रहे हैं. मुझे नहीं लगता उन्हें ऐसा करने की जरूरत है. द्रविड़ इससे दूर रहें क्योंकि हम जानते हैं कि पंत के पास अच्छी शॉट खेलने की काबलीयत हैं. यह ध्यान देने की जरूरत है कि क्या पंत नेगेटिव या पॉजिटिव फ्रेम में थे. मैं अपको इस बात की गारंटी देता हूं कि पंत एक अलग स्तिथि में हैं. इस पारी में वो एक निगेटिव माइंडसेट में थे."

 

तीसरे टेस्ट में भी नहीं दिखा सके कमाल 
बता दें कि केपटाउन में जारी सीरीज के तीसरे और आखिरी टेस्ट में भी पंत ने आक्रामक तरीके से खेलना शुरू किया और सिर्फ 27 रन बनाकर आउट हो गए. जबकि उनके सामने कप्तान कोहली बड़ी पारी खेलने की तरफ बढ़ रहे थे. ऐसे में उन्हें क्रीज पर समय बिताकर कप्तान का साथ देना था, न कि रन बनाने पर ध्यान देना था. इसका आलम यह रहा कि भारतीय टीम पहली पारी में सिर्फ 223 रन ही बना सकी. 
 

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