कुछ साल पहले तक नजफगढ़ में रहने वाले रेलवे सुरक्षा बल के सहायक सब इंस्पेक्टर (एएसआई) राम निवास यादव अपने सबसे छोटे बेटे प्रिंस के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित थे, जिसकी दिलचस्पी केवल टेनिस बॉल टूर्नामेंट में यॉर्कर गेंदबाजी करने में थी, लेकिन इस युवा क्रिकेटर को खुद पर भरोसा था और उसने अपने पिता से सीधे शब्दों में कह दिया कि वह उनकी चिंता करना छोड़ दें. वह खुद से कुछ कर लेंगे और अब राम निवास यादव का सबसे छोटा बेटा अपने वादे पर खरा उतर चुका.
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लखनऊ सुपर जायंट्स के इस स्विंग गेंदबाज का नाम है प्रिंस यादव, जो आईपीएल में अक्षर पटेल और इशान किशन जैसे अनुभवी भारतीय बल्लेबाजों के डिफेंस को भेदने में सफल रहा. प्रिंस के पिता रामनिवास ने कहा कि उन्होंने प्रिंस को दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल की परीक्षा में बैठने के लिए मजबूर किया. वह शारीरिक रूप से फिट था, लेकिन लिखित परीक्षा के लिए अच्छी तरह से तैयार नहीं था क्योंकि उसका ध्यान कहीं और था.
कांस्टेबल की परीक्षा छोड़ी
प्रिंस के पिता रामनिवास का कहना है कि कोई भी पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित होगा और वह भी थे. 18 साल की उम्र तक उसने चमड़े की गेंद से एक बार भी गेंदबाजी नहीं की थी. मैंने उसे दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल की परीक्षा में बैठने के लिए मजबूर किया. वह शारीरिक रूप से फिट था, लेकिन लिखित परीक्षा के लिए अच्छी तरह से तैयार नहीं था क्योंकि उसका ध्यान कहीं और था. रामनिवास ने आखिर अपने बेटे की जिद मान ली. उन्होंने कहा कि प्रिंस के शानदार प्रदर्शन के बाद अब नजफगढ़ के खेड़ा डाबर गांव से भी लोग उनके घर पर बधाई देने के लिए आने लगे हैं.
दो मैचों में चार विकेट
रामनिवास के अनुसार प्रिंस के पहले और अब तक के एकमात्र कोच अमित वशिष्ठ और भारत के अंडर-19 विश्व कप विजेता तेज गेंदबाज प्रदीप सांगवान ने उनके खेल में निखार लाने में अहम भूमिका निभाई. एक समय ऐसा भी था जब प्रिंस अपनी पीठ पर रेत की बोरी बांध धान के खेतों में दौड़ते थे, ताकि उनके शरीर का ऊपरी हिस्सा मजबूत बन जाए. प्रिंस के प्रदर्शन की बात करें तो दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ उन्होंने 20 रन पर दो विकेट लिए, जबकि सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 34 रन पर दो विकेट लिए.
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