Vaibhav Sooryavanshi performance in IPL: 15 साल के वैभव सूर्यवंशी आईपीएल 2026 में हर एक गेंदबाज के लिए बुरा सपना बन गए हैं. उन्होंने इस गेंदबाज की धुनाई की. कुछ समय पहले राजस्थान रॉयल्स के ट्रायल्स में जब उन्होंने हिस्सा लिया था, तब न तो उनके पास वह जबरदस्त ‘बैक-लिफ्ट’ थी और न ही बल्ले की वह तेज ‘स्पीड’ थी, जिससे अब गेंदबाज खौफ खा रहे हैं. सूर्यवंशी को खतरनाक बल्लेबाज बनाने में वो तीन महीने सबसे अहम है, जिसमें उनकी स्पीड पर काम किया गया.
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देश के सबसे बेहतरीन आधुनिक बल्लेबाजी मेंटोर और बैटिंग कोच जुबिन भरूचा ने सूर्यवंशी पर भी काम किया है. उन्होंने सूर्यवंशी की बल्लेबाजी के पीछे के विज्ञान और उन खासियतों के बारे में बताया जो उन्हें सबसे अलग बनाती हैं.
बैक-लिफ्ट धीरे-धीरे विकसित
पीटीआई के अनुसार भरूचा ने बताया कि वैभव की एक अनोखी खासियत यह है कि वह खेल के साथ-साथ खुद को भी बेहतर बनाते जाते हैं. लोग आज जो देखते हैं, वह तब आठ साल के था, तो ऐसा नहीं था. यह जबरदस्त बैक-लिफ्ट धीरे-धीरे तब विकसित हुई, जब उसके आस-पास गेंदबाजी का स्तर और गति बेहतर होती गई. भरूचा लंबे समय से रॉयल्स से जुड़े हुए हैं. उन्होंने बताया कि 2025 के आईपीएल की शुरुआत से पहले कोचों ने उनकी बल्ले की ‘स्पीड’ पर कैसे काम किया.
30 प्रतिशत तक बढ़ी बल्ले की स्पीड
मुंबई के इस पूर्व बल्लेबाज ने बताया कि दिलचस्प बात यह है कि जिस ट्रायल में सूर्यवंशी ने हिस्सा लिया था, उस ग्रुप में उनकी बल्ले की ‘स्पीड’ सबसे तेज नहीं थी. इस बात को पहचाना गया और तीन महीने तक इस पर पूरी लगन से काम किया गया, जिसके बाद उनकी बल्ले की ‘स्पीड’ में 30 प्रतिशत तक और सुधार कर पाए.
समय को एक पल के लिए थाम लेने की क्षमता
उन्होंने कहा कि गेंद को खेलने का फैसला थोड़ा देर से लेने की काबिलियत, यानी समय को एक पल के लिए थाम लेने की क्षमता ही सूर्यवंशी को बाकी बल्लेबाजों से अलग बनाती है. उन्होंने कहा कि अगर आपने सूर्यवंशी को खेलते हुए देखा है, तो आपने पाया होगा कि उनका फुटवर्क बहुत कम होता है. वह ज्यादातर एक ही जगह खड़े होकर, बल्ले की जबरदस्त ‘स्पीड’ और ऊंची बैक-लिफ्ट की मदद से गेंद को हिट करता है, लेकिन उनके पिछले पैर में एक हल्की सी हलचल (ट्रिगर) होती है, जिसकी मदद से वह क्रीज की गहराई का पूरा फायदा उठा पाते हैं.
भरूचा ने कहा कि इसका बहुत सारा क्रेडिट उनके बैकफुट पर ‘लोड’ होने और उसके ‘बैक-लिफ्ट’ को जाता है. बैक-लिफ्ट सिर्फ एक स्टाइल की बात नहीं है. जैसे ही गेंद आती है, शरीर, हाथ और आंखें मिलकर एक साथ काम करते हैं ताकि जगह का सही अंदाजा लग सके.
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