LSG के खिलाफ अंगकृष रघुवंशी के विवादित आउट होने पर MCC ने तोड़ी चुप्पी, अंपायर के फैसले का किया बचाव

लखनऊ सुपर जायंट्स के ख‍िलाफ मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स के बल्लेबाज अंगकृष रघुवंशी को 'ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड' (फील्ड में बाधा डालने) के कारण आउट दिया गया था. '

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अंगकृष रघुवंशी को ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड के कारण आउट द‍िया गया था. (PC: X)

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अंगकृष रघुवंशी को ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड के कारण आउट द‍िया गया था.

मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब ने अंपायर के फैसले का बचाव किया.

क्रिकेट के नियमों का संरक्षक मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब ने गुरुवार को आईपीएल 2026 के दौरान अंपायरों के उस विवादास्पद फैसले का बचाव किया, जिसमें कोलकाता नाइट राइडर्स के बल्लेबाज अंगकृष रघुवंशी को 'ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड' (फील्ड में बाधा डालने) के कारण आउट दिया गया था. 'ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड' से संबंधित एक नियम स्पष्टीकरण जारी करते हुए लंदन स्थित इस क्लब ने कहा कि रघुवंशी को आउट दिए जाने का फैसला उन मानदंडों के अनुरूप था, जिनके अनुसार कोई भी बल्लेबाज जो दौड़ते समय अपनी दिशा बदलता है, विशेष रूप से वह जो पिच पर दौड़ने के लिए अपनी दिशा बदलता है, या कोई ऐसा रास्ता अपनाता हैं जो दूसरे छोर तक पहुंचने का सबसे तेज़ तरीका नहीं होता तो यह माना जाएगा कि वह जानबूझकर ऐसा कर रहा है. 

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यह विवादित घटना पिछले रविवार को लखनऊ के एकाना स्टेडियम में KKR और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच हुए मैच के दौरान हुई. रघुवंशी ने तेजी से एक रन लेने की कोशिश की, लेकिन उनके साथी खिलाड़ी ने उन्हें वापस भेज दिया. वह मुड़े, क्रीज़ पर सुरक्षित पहुंचने के लिए डाइव लगाई और तभी गेंद उनके शरीर पर जा लगी. LSG के फील्डरों ने अपील की और रिव्यू के बाद तीसरे अंपायर रोहन पंडित ने उन्हें 'आउट' करार दिया. पंडित ने अपने फैसले में कहा कि रघुवंशी ने अपनी ओर गेंद आते देख अपनी दौड़ने की दिशा बदल ली थी. 

क्या है न‍ियम?


फील्ड में बाधा डालने (Obstructing the field) से जुड़े नियम को समझाते हुए MCC ने कहा है कि नियम 37.1.1 कहता है कि कोई भी बल्लेबाज 'फील्ड में बाधा डालने' के कारण तब आउट माना जाएगा, जब वह 'जान-बूझकर अपने शब्दों या हरकतों से फील्डिंग करने वाली टीम को रोकने या उनका ध्यान भटकाने की कोशिश करता है. इसका मतलब है कि बाधा जान-बूझकर डाली गई होनी चाहिए, जिसका पता लगाना कई बार मुश्किल हो सकता है.

 

न‍ियम के अनुसार लिया गया था फैसला


MCA ने कहा कि 'फील्ड में रुकावट डालने' के कारण रघुवंशी को आउट दिए जाने का मामला इसी नियम के अनुसार था, क्योंकि विकेटों के बीच दौड़ते समय उन्होंने जान-बूझकर अपनी दिशा ऑफ-साइड से बदलकर पिच के लेग-साइड की ओर कर ली थी. रघुवंशी इन शर्तों को साफ तौर पर पूरा करते हैं. जब वह दौड़ना शुरू करते हैं, तो वह विकेट के ऑफ-साइड में होते हैं. जैसे ही गेंद फील्डर तक पहुंचती है, वह पिच के बीच में आ जाते हैं, जहां उन्हें किसी भी हाल में नहीं दौड़ना चाहिए था और फिर मुड़कर लेग-साइड की ओर वापस दौड़ते हैं, जिससे वह गेंद और विकेट के बीच आ जाते हैं. यह एक जान-बूझकर किया गया काम है. अगर वह पिच से बाहर रहते, यानी ऑफ-साइड में ही बने रहते, तो गेंद उन्हें नहीं लगती और रुकावट डालने का कोई सवाल ही नहीं उठता.अगर उन्होंने लेग-साइड की ओर दौड़ना शुरू किया होता और फिर गेंद लगने से पहले उसी तरफ अपने क्रीज में वापस लौट आए होते, तो भी उन्हें 'नॉट आउट' दिया जाता, वह रास्ते में तो होते, लेकिन जान-बूझकर नहीं. पिच को जान-बूझकर पार करना ही उनके आउट होने का कारण बना. 


MCC ने यह भी साफ किया कि 'फील्ड में रुकावट डालने' (obstructing the field) जैसे आउट के मामले में इस बात पर ध्यान नहीं दिया जाता कि अगर रुकावट न होती, तो क्या बल्लेबाज वैसे भी बच जाता.MCC के बयान में कहा गया कि कुछ लोगों का कहना है कि रघुवंशी को आउट नहीं दिया जाना चाहिए था, क्योंकि अगर गेंद उन्हें न भी लगती, तब भी वह अपनी क्रीज तक पहुंच जाते. हालांकि इस बात पर विचार नहीं किया जाता. बशर्ते कि रुकावट कैच लेने से रोकने के लिए न हो, तो 'फील्ड में रुकावट डालने' के नियम के तहत यह बात मायने नहीं रखती कि बल्लेबाज़ के आउट होने की कितनी संभावना थी. 
 

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