राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग ने आईपीएल के दौरान निजी तौर पर उनको निशाना बनाने वाले टीवी कमेंटेटरों और एक्सपर्ट पर पलटवार करते हुए उनसे खिलाड़ियों का सम्मान करने और क्रिकेट के बारे में बात करने तक ही सीमित रहने का आग्रह किया. राजस्थान की मंगलवार को लखनऊ सुपर जायंट्स पर जीत के बाद पराग ने मैदान से बाहर के मुद्दों को लेकर उनकी आलोचनाओं पर निराशा व्यक्त की. इसमें ड्रेसिंग रूम में वेपिंग (ई-सिगरेट का सेवन) करते हुए पकड़े जाना भी शामिल है. पराग हैमस्ट्रिंग की समस्या के कारण लखनऊ के खिलाफ नहीं खेले थे.
ADVERTISEMENT
रोहित-कोहली को अफगानिस्तान के खिलाफ क्यों नहीं दिया गया आराम?
पराग ने सात विकेट की जीत के बाद मीडिया से कहा कि आईपीएल में इस साल बाहर भी बहुत कुछ हो रहा है. उन्हें लगता है कि पूरा देश क्रिकेट को बहुत पसंद करता है. खिलाड़ी जब भी मौका मिलता है अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश करते हैं.
एक ही नजरिए से देखने की जरूरत
उन्होंने आगे कहा कि वह लोग दर्शकों की अपेक्षाओं के अनुरूप प्रदर्शन करते हैं. इसलिए उन्हें लगता है कि सभी को क्रिकेट से प्यार करना चाहिए और इसे एक ही नजरिए से देखना चाहिए. खिलाड़ी बहुत मेहनत कर रहे हैं. अगर कोई टीम 75 या 80 रन पर आउट हो जाती है, तो यह कहना बहुत आसान होता है कि उन्हें खेलना नहीं आता या उनके पास खेलने की मानसिकता नहीं है.
क्रिकेट की बात करने की अपील
पराग ने कहा कि लेकिन उस मैच से पहले इसकी तैयारी के लिए तीन- चार दिन का समय मिलता है कि वह कैसे 200 से 250 रन बना सकें. कभी-कभी ऐसा नहीं हो पाता. पराग ने कहा कि वह लोग भी इंसान हैं और उन लोगों से भी गलतियां होती हैं. इसलिए उन्हें लगता है कि बाहर जो कुछ भी हो रहा है, विशेषकर कमेंटेटर जिस तरह की टिप्पणी कर रहे हैं, वह उनसे आग्रह करते हैं कि वे क्रिकेट से प्यार करें. क्रिकेट की बात करें.
आलोचनाओं का मानसिकता पर असर नहीं
पराग को श्रीलंका में होने वाली त्रिकोणीय सीरीज के लिए इंडिया ए का उप-कप्तान बनाया गया है. उन्होंने कहा कि यह खेल देश का सबसे अहम खेल है. इसमें वह सर्वश्रेष्ठ हैं. उन्हें लगता है कि इसके प्रति थोड़ा सम्मान का व्यवहार किया जाना चाहिए. सिर्फ क्रिकेट के बारे में बात करनी चाहिए. पराग ने कहा कि पिछले चार सालों से जो कहते आ रहे हैं, उससे उन्हें एक बात समझ में आई है कि वह कुछ भी करें, बातें तो होती ही रहेंगी. उन्होंने यह भी समझ लिया है कि जो भी बातें हो रही हैं, उनका उनके खेल, उनकी फॉर्म या उनकी मानसिकता पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए, क्योंकि कीबोर्ड पर बैठकर आलोचना करने वाले लोग बाहरी हैं.
ADVERTISEMENT










