भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अगले मीडिया राइट्स साइकिल में IPL को 74 मैचों से बढ़ाकर 94 मैच करने का प्लान बना रही है, जिससे हर फ्रेंचाइज को पूरे 'होम-एंड-अवे' फॉर्मेट में खेलने का मौका मिलेगा. अभी IPL का सीजन लगभग 60 से 65 दिनों तक चलता है, लेकिन मौजूदा ढांचे में सभी टीमों को एक-दूसरे के खिलाफ 'होम' और 'अवे' दोनों जगहों पर खेलने का मौका नहीं मिल पाता है.
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आईपीएल चेयरमैन अरुण धूमल ने आईपीएल को लेकर बोर्ड की प्लानिंग पर खुलकर बात की. इंडिया टुडे से बातचीत में धूमल ने कहा कि सबसे अच्छा तरीका यह होगा कि एक पूरा 'डबल राउंड-रॉबिन' शेड्यूल बनाया जाए, जिसमें हर टीम नौ मैच अपने घर पर और नौ मैच बाहर खेले. उन्होंने कहा कि
हम ऐसा चाहेंगे, क्योंकि इससे सभी टीमों को नौ घरेलू और नौ बाहरी मैच खेलने का मौका मिलेगा और हमें उम्मीद है कि हमारे द्विपक्षीय और ICC से जुड़े कमिटमेंट्स को देखते हुए तो अगर अगले मीडिया साइकिल में हमें ज़्यादा समय मिलता है तो हम मैचों की संख्या बढ़ाकर 94 करने में बहुत खुशी महसूस करेंगे.
बड़ी विंडो की जरूरत
हालांकि सबसे बड़ी रुकावट ICC का Future Tours Programme (FTP) है, जो अभी 2027 तक के लिए तय हो चुका है. कैलेंडर विंडो को बढ़ाए बिना टूर्नामेंट का विस्तार करने से डबल-हेडर मैचों की संख्या बढ़ जाएगी, जिसके लिए ब्रॉडकास्टर ज़्यादा उत्साहित नहीं हैं. धूमल का कहना है कि इसीलिए एक बड़ी विंडो की ज़रूरत है. अगर छोटी विंडो में मैचों की संख्या 74 से बढ़ाकर 94 कर दी जाए तो डबल-हेडर मैच ज़्यादा होंगे, लेकिन इससे ब्रॉडकास्टरों को कोई खास फ़ायदा नहीं होगा. ब्रॉडकास्टरों के हितों का भी ध्यान रखना होगा. इसीलिए डबल-हेडर मैच कम रखने और 94 मैच करवाने के लिए एक बड़ी विंडो की जरूरत है.
अलग-अलग हिस्सों में बांटा जा सकता शेड्यूल
धूमल ने यह भी सुझाव दिया कि IPL का शेड्यूल इंटरनेशनल शेड्यूल और भारत के मौसम के हालात के आधार पर साल के अलग-अलग हिस्सों में बांटा जा सकता है. उन्होंने कहा कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अगले बाइलेटरल साइकिल में इसे कैसे मैनेज किया जा सकता है. इस बारे में संबंधित बोर्ड्स के साथ बैठकर इस पर बात करनी होगी और कोई हल निकालना होगा. अगर सितंबर-अक्टूबर के दौरान कोई विंडो मिल जाती है तो इसका कुछ हिस्सा उस समय रखा जा सकता है. अगर फरवरी से अप्रैल के बीच कोई विंडो मिल जाती है, तो वह भी अच्छा रहेगा.
बाइलेटरल सीरीज से ऊपर आईपीएल
लंबे IPL से दूसरे बोर्ड्स के लिए बाइलेटरल क्रिकेट से होने वाली कमाई को नुकसान पहुंचाने के सवाल पर धूमल ने तर्क दिया कि लीग्स खिलाड़ियों और प्रशासकों दोनों के लिए ही ज़्यादा से ज़्यादा कीमती होती जा रही हैं. उन्होंने कहा कि इससे उनकी कमाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्हें भी इससे फ़ायदा हो रहा है. खिलाड़ियों के फ़ायदे को ही देखना है. हर खिलाड़ी को द्विपक्षीय क्रिकेट के मुकाबले IPL या किसी भी लीग में ज़्यादा अहमियत नज़र आ रही है. इसलिए यह देखना होगा कि आख़िरकार संबंधित बोर्ड या खिलाड़ी के लिए ज़्यादा फ़ायदेमंद क्या है. अगर द्विपक्षीय क्रिकेट में लोगों की दिलचस्पी कम हो रही है और दूसरे बोर्ड्स द्विपक्षीय मैचों से ज़्यादा कमाई नहीं कर पा रहे हैं, तो हो सकता है कि इसे करने का कोई और तरीका हो.
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