आमतौर पर तेज गेंदबाज ही बाउंसर से खौफ पैदा करते नजर आते हैं. T20 क्रिकेट में किसी स्पिनर को इसका इस्तेमाल करते देखना बहुत कम ही होता है, लेकिन क्रुणाल पंड्या ने अचानक बाउंसर का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. उन्होंने मुंबई इंडियंस के खिलाफ भी बाउंसर फेंके. उनकी बाउंसर का सामना तो मुंबई के कप्तान और उनके भाई हार्दिक पंड्या भी नहीं कर पाए. RCB के इस ऑलराउंडर ने मुंबई इंडियंस के ख़िलाफ 1/26 के अपने स्पेल के दौरान शॉर्ट बॉल की रणनीति अपनाई थी.
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बाउंसर के इस्तेमाल करने पर चुप्पी तोड़ते हुए उन्होंने कहा कि 'इम्पैक्ट प्लेयर' नियम की वजह से ही उन्होंने बल्लेबाज को खुलकर खेलने से रोकने के लिए बाउंसर का इस्तेमाल किया. आरसीबी की टीम के बाद उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी भी अलग और नई चीजें आजमाने से परहेज नहीं किया,क्योंकि अगर 'इम्पैक्ट प्लेयर' नियम को देखें, तो जब यह नियम नहीं था, तब नंबर छह और नंबर सात पर ऑलराउंडर होते थे. तब बल्लेबाज़ी का अंदाज काफ़ी अलग था, लेकिन अब जब टीम में 8 बल्लेबाज़ हैं और साथ ही उनके पास बेहतरीन कौशल भी है.
बाउंसर का इस्तेमाल पहले से तय नहीं
क्रुणाल ने आगे कहा कि बतौर गेंदबाज वह हमेशा अपनी स्किल्स और मानसिक लड़ाई दोनों में एक कदम आगे रहना चाहते हैं. पंड्या ने कहा कि बाउंसर का उनका इस्तेमाल पहले से तय नहीं होता, बल्कि यह अचानक होता है.उन्होंने आगे कहा कि वे उस पल में अपनी अंदर की आवाज पर भरोसा करते हैं और जो भी फैसला लेते हैं, उसे पूरे कमिटमेंट्स
के साथ निभाते हैं. उन्होंने कहा कि
मैं ऐसा इंसान हूं जो अपनी गट फीलिंग पर चलता है. मैं पहले से यह प्लान नहीं करता कि मुझे चौथी, पांचवीं या छठी गेंद पर बाउंसर डालनी है. कुछ दिन ऐसे होते हैं जब मैं लगातार दो बाउंसर डालता हूं, और अचानक मैं पहली और छठी गेंद पर बाउंसर डाल देता हूं. इसलिए ऐसा कोई तय प्लान नहीं होता कि मुझे कौन सी गेंद डालनी है.
क्रुणाल पंड्या ने बेंगलुरु की टीम में अपना अहम योगदान दिया. उन्होंने सूर्यकुमार यादव की अहम विकेट लिया. बेंगलुरु के दिए 241 रन के लक्ष्य के जवाब में मुंबई इंडियंस की टीम पांच विकेट पर 222 रन ही बना सकी और 18 रन से मुकाबला गंवा दिया.
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