भारत के महान बल्लेबाज रहे सुनील गावस्कर ने चोट की वजह से आईपीएल की शुरुआत से उपलब्ध नहीं रहने वाले विदेशी खिलाड़ियों पर फिर से निशाना साधा है. उनका कहना है कि आईपीएल के जरिए न केवल विदेशी खिलाड़ी बल्कि उनके बोर्ड्स को भी मोटी कमाई होती है. सुनील गावस्कर का कहना है कि जो विदेशी खिलाड़ी आईपीएल के पहले मुकाबले से अपनी टीमों के लिए उपलब्ध नहीं होते हैं उन पर भी बैन जैसी कार्रवाई करनी चाहिए. इससे कड़ा संदेश जाएगा.
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आईपीएल 2026 के दौरान देखा गया है कि कई विदेशी खिलाड़ी चोटों की वजह से अभी तक टीमों का हिस्सा नहीं बन पाए हैं. इनमें मिचेल स्टार्क (दिल्ली कैपिटल्स), विल जैक्स (इंग्लैंड), जॉश हेजलवुड(रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु) जैसे खिलाड़ी चोट, रिकवरी और दूसरे कारणों से अभी तक अपनी-अपनी आईपीएल टीमों से नहीं जुड़ सके हैं.
गावस्कर ने स्पोर्टस्टार के लिए लिखा, 'आईपीएल न केवल विदेशी खिलाड़ियों बल्कि उनके बोर्ड्स के लिए भी दूध देने वाली गाय है. क्या सामान्य भारतीय फैन को पता है कि विदेशी बोर्ड्स को उनके खिलाड़ी के आईपीएल का हिस्सा बनने पर 10 फीसदी पैसा मिलता है. यह साफ नहीं है कि एनओसी के लिए यह पैसा बीसीसीआई देती है या फ्रेंचाइज.'
गावस्कर ने बताया पिछले 2 सीजन में विदेशी बोर्ड्स को IPL से कितनी कमाई हुई
गावस्कर ने लेख में बताया कि पिछले दो सीजन के दौरान किस देश के बोर्ड को कितने रुपये आईपीएल के जरिए मिले. उन्होंने लिखा, 'पिछले दो सीजन को देखा जाए तो ऑस्ट्रेलिया के 16 खिलाड़ियों को अलग-अलग फ्रेंचाइज ने खरीदा और इन पर 121.65 करोड़ रुपये खर्च हुए. इंग्लैंड के 12 खिलाड़ी 68 करोड़, न्यूजीलैंड के 12 खिलाड़ी 33 करोड़ और साउथ अफ्रीका के 17 खिलाड़ियों को 71 करोड़ रुपये में लिया गया. वेस्ट इंडीज के आठ खिलाड़ी 59 करोड़ रुपये में आईपीएल का हिस्सा बने. प्रत्येक क्रिकेट बोर्ड ने इस दौरान अपने खिलाड़ियों के आईपीएल में खेलने को लेकर एनओसी भेजने के लिए अच्छा पैसा बनाया है.'
गावस्कर बोले- बैन जैसा कदम उठाए बीसीसीआई
गावस्कर ने कहा कि इतना पैसा देने के बाद भी अगर विदेशी प्लेयर समय पर नहीं आते हैं तो कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा, 'भारत में हम क्रिकेट को पसंद करते हैं और क्रिकेटर्स को इससे भी ज्यादा प्यार देते हैं. और हां, खिलाड़ियों का इंश्योरेंस भी होता है. इसलिए शायद अगर कोई खिलाड़ी सारे मैच खेलने नहीं आता है तब फ्रेंचाइज की जेब से पैसा नहीं जाता है. लेकिन निश्चित रूप से फ्रेंचाइज के लिए समय आ गया है कि वे कठोर बने और खिलाड़ियों को दिए जाने वाले पैसों को लेकर कड़ाई से पेश आएं. शायद बीसीसीआई को दखल देनी चाहिए जिस तरह से उन्होंने ऑक्शन में बिकने के बाद बाहर होने वाले खिलाड़ियों को दो साल के लिए बैन कर किया. जो खिलाड़ी पहले मुकाबले से उपलब्ध नहीं होते हैं उन पर भी ऐसी ही कार्रवाई होनी चाहिए. इससे उन लोगों को कड़ा संदेश जाएगा जो भारतीय क्रिकेट को हल्के में लेते हैं.'
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