Vaibhav Sooryavanshi started red-ball practice: वैभव सूर्यवंशी ने महज 15 साल की उम्र और अपने दूसरे ही IPL सीजन में बीते दिन अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में बैटिंग के लगभग सभी अवॉर्ड्स अपने नाम कर लिए. इस सीजन में जहां उन्होंने 237.31 की जबरदस्त स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाए. उन्होंने न सिर्फ 'इमर्जिंग प्लेयर' का अवॉर्ड जीता, बल्कि 'ऑरेंज कैप', 'सुपर स्ट्राइकर' अवॉर्ड और 'मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर' का अवॉर्ड भी अपने नाम किया.
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सूर्यवंशी के इस टैलेंट को देखते हुए भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने हाल में कहा था कि वह उन्हें टेस्ट क्रिकेट खेलते हुए देखना चाहते हैं. उनके इस कमेंट के बाद सूर्यवंशी ने भी अपने करियर की सबसे बड़ी चुनौती पर अपनी नजरें जमा ली हैं. जहां एक ओर भारत के लिए डेब्यू को लेकर चर्चा लगातार जोर पकड़ रही है, वहीं दूसरी ओर सूर्यवंशी अभी से T20 क्रिकेट से आगे की सोच रहे हैं.
टेस्ट क्रिकेट की तैयारी शुरू
गुजरात टाइटंस को हराकर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के आईपीएल 2026 का खिताब जीतने के बाद सूर्यवंशी ने ब्रॉडकास्टर से बात करते हुए कहा कि वह उनका सपना टेस्ट क्रिकेट खेलने का है. सुनील गावस्कर और हरभजन सिंह की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि फैंस जल्द ही भारत 'A' के आगामी मैचों के दौरान उनकी बल्लेबाज़ी का एक अलग ही अंदाज़ देखेंगे. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि वह लाल गेंद (red ball) से खेलने के लिए भी काफी मेहनत कर रहे हैं. हालांकि सूर्यवंशी ने अपनी प्रैक्टिस के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी, लेकिन उन्होंने आने वाले समय में होने वाली रोमांचक चीज़ों की ओर इशारा ज़रूर किया. उन्होंने कहा कि
अभी मैंने लाल बॉल से प्रैक्टिस की है, किसी ने देखा नहीं है. देखेंगे सब.
हर गेंद पर शॉट लगाना पसंद
जब हरभजन सिंह ने उनसे टेस्ट क्रिकेट में उनकी महत्वाकांक्षाओं के बारे में और पूछा तो सूर्यवंशी ने स्पष्ट किया कि भले ही वे छक्के लगाने की अपनी काबिलियत के लिए जाने जाते हैं, लेकिन यह उनके खेल का एकमात्र पहलू नहीं है. उन्होंने कहा कि लोगों को लगता है कि उन्हें हर गेंद पर शॉट लगाना पसंद है, लेकिन यह T20 फ़ॉर्मेट है और कोच उन्हें पूरी आज़ादी देते हैं कि वह खुलकर खेलें और वह गेंद पर शॉट सिर्फ इसलिए लगाते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि वह ऐसा कर सकते हैं. यह कोई मजबूरी नहीं है.
उन्होंने आगे कहा कि वह टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहते हैं, क्योंकि उनके पिता ने भी उन्हें यही सिखाया है कि यह क्रिकेट का सबसे बेहतरीन फ़ॉर्मेट है और उन्हें इसे खेला भी है. हालांकि उन्हें अभी और भी कई मैच खेलने हैं. उन्हें रणजी ट्रॉफ़ी क्रिकेट खेला है, लेकिन उन्हें ज़्यादा मौके नहीं मिले और यह उनके लिए काफ़ी मुश्किल था, लेकिन वह अपने खेल के इस पहलू पर लगातार काम करते रहेंगे.
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