कौन हैं कमेंट्री में कमाल करने वाले इयान बिशप, बॉलिंग से तोड़े थे जबड़े, कांपते थे बल्लेबाज, 30 की उम्र में लेना पड़ा संन्यास

वेस्ट इंडीज से आने वाले इयान बिशप आईपीएल 2026 में कमेंट्री के जरिए काफी वाहवाही बटोर रहे हैं. अनजाने खिलाड़ियों के बारे में डिटेल और यादगार लाइनों के चलते उन्हें काफी पसंद किया जाता है.

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इयान बिशप वेस्ट इंडीज के पेसर रहे हैं. (Photo: Getty)

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इयान बिशप ने ही 'कार्लोस ब्रेथवेट रिमेंबर द नेम' जैसी यादगार लाइन बोली थी.

इयान बिशप ने वेस्ट इंडीज के लिए 43 टेस्ट और 84 वनडे मैच खेले.

आईपीएल 2026 में कमेंट्री के जरिए एक बार फिर से इयान बिशप तारीफें बटोर रहे हैं. वेस्ट इंडीज के इस पूर्व क्रिकेटर की अनजाने भारतीय खिलाड़ियों के बारे में दी जाने वाली जानकारियों के चलते वाहवाही हो रही है. इयान बिशप की कमेंट्री का उदाहरण हिंदी में मैच की जानकारी देने वाले आकाश चोपड़ा, हरभजन सिंह और वीरेंद्र सहवाग जैसे भारतीयों को दिया जा रहा है. लेकिन कौन हैं इयान बिशप और कैसे क्रिकेटर के तौर पर करियर समाप्त होने के बाद वे कमेंट्री में आ गए.

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इयान बिशप वेस्ट इंडीज के घातक तेज गेंदबाज रहे हैं. तूफानी पेस, घातक बाउंसर और डरावनी स्विंग के चलते उन्होंने काफी नाम कमाया था. 21 साल की उम्र में बिशप ने 1989 में भारत के सामने टेस्ट डेब्यू किया. पहले टेस्ट में ज्यादा बॉलिंग का मौका नहीं मिला. लेकिन दूसरे टेस्ट की पहली पारी में 87 पर छह विकेट लेकर उन्होंने अपने आने का ऐलान कर दिया. सीरीज में बिशप ने चार टेस्ट में 23.12 की औसत से 16 विकेट लिए. इससे पहले खेली गई वनडे सीरीज में उन्होंने भारतीय बल्लेबाज कृष्णमाचारी श्रीकांत की बाजू तोड़ दी थी.

इयान बिशप दो साल में बन गए वेस्ट इंडीज के मुख्य बॉलर

 

बिशप 1989 से 1990 तक वेस्ट इंडीज के मुख्य गेंदबाजों में शामिल हो गए. इन दो साल में 11 टेस्ट में 53 विकेट निकाले. अपने लंबे, सीधे और परंपरागत एक्शन व रन अप के जरिए उन्होंने बल्लेबाजों के मन में भय पैदा कर दिया था. इस बीच चोट ने उनके करियर में पहली बड़ी बाधा डाली. वे 1991 में पूरे साल नहीं खेल सके. 1992 में टेस्ट खेले और 10 विकेट निकाले. लेकिन बार-बार चोट उभऱ आती और उन्हें बाहर जाना पड़ता.

बिशप ने श्रीकांत की बाजू और स्मिथ का तोड़ा था जबड़ा

 

1993 में फिर से लगी चोट ने उन्हें दो साल तक क्रिकेट से दूर रखा. वे 1995 में वापस आ सके. आते ही फिर से गदर मचाया. इंग्लैंड के सामने ओल्ड ट्रेफर्ड टेस्ट में रॉबिन स्मिथ का जबड़ा तोड़ दिया. उस साल उन्होंने छह टेस्ट खेले और 27 विकेट लिए. लेकिन बार-बार होने वाली चोटों ने बिशप के करियर को काफी नुकसान पहुंचाया. इसके चलते उन्हें 1998 में 30 साल की उम्र में खिलाड़ी के तौर पर क्रिकेट को छोड़ना पड़ा. उनके नाम 43 टेस्ट रहे जिनमें 24.27 की औसत से 161 विकेट रहे. छह बार उन्होंने एक पारी में पांच या इससे ज्यादा विकेट का कमाल किया. वहीं 84 वनडे में 116 विकेट उनके नाम रहे.

इयान बिशप कैसे बने कमेंटेटर

 

बिशप रिटायर होने के बाद क्रिकेट से दूर होने वाले थे. लेकिन किस्मत उन्हें फिर से इस खेल के करीब ले आई. अबकी बार कमेंटेटर के तौर पर. साल 2000 में इंग्लिश टीम जब वेस्ट इंडीज दौरे पर गई तब चैनल 4 को एक कमेंटेटर की जरूरत थी. बिशप के दोस्त के दोस्त ने उनकी सिफारिश की. इससे बाद वे कमेंट्री बॉक्स में जम गए. बिशप का कहना है कि वे कमेंटेटर बनना नहीं चाहते थे लेकिन भगवान की मर्जी से यह राह खुल गई.

बिशप ने कमेंट्री में कई यादगार बातें कही हैं. इनमें सबसे ज्यादा शोहरत 2016 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में बोली गई लाइन ने दिलाई. उन्होंने कहा था, 'कार्लोस ब्रेथवेट... रिमेंबर द नेम'. विंडीज खिलाड़ी के लगातार चार छक्के लगाकर टीम को दूसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बनाने पर उन्होंने यह कमेंट किया था.

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