ऋषभ पंत की लखनऊ सुपर जायंट्स ने आईपीएल 2026 के 15वें मैच में कोलकाता नाइट राइडर्स को तीन विकेट से हरा दिया. लखनऊ की इस शानदार जीत के हीरो मुकुल चौधरी रहे, जिन्होंने 182 रन के लक्ष्य के जवाब में लखनऊ के लिए 27 गेंदों में नॉटआउट 54 रन की पारी खेलकर कोलकाता के मुंह से जीत छीन ली. इसके बाद तो वह हर जगह छा गए. मुकुल रातोंरात स्टार बन गए. वह प्लेयर ऑफ द मैच रहे.
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मैच के बाद अपने सफर के बारे में बात करते हुए मुकुल ने कहा कि उनका क्रिकेटर बनने का सफर तो उनके जन्म से पहले ही शुरू हो गया था. उनके पिता का सपना था कि उनका बेटा क्रिकेट खेलेगा. उनके जन्म के बाद उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, इसलिए वह जल्दी शुरुआत नहीं कर सके.
12-13 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू
मुकुल ने बताया कि उन्होंने लगभग 12-13 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया था. उस समय ज़्यादा एकेडमी नहीं थीं. एक नई एकेडमी में उन्होंने लगभग 5–6 साल तक ट्रेनिंग ली थी. इसके बाद बेहतर मौकों की तलाश में उन्हें कई शहर बदलने पड़े. वह झुंझुनू से जयपुर चले गए. जहां उन्होंने चार साल ट्रेनिंग की. इसके बाद वह 3-4 महीने गुरुग्राम में रहे और दिल्ली में मैच खेले, जिससे उन्हें तेज रफ़्तार वाली क्रिकेट के हिसाब से ढलने में बहुत मदद मिली.
पिता को भरोसा
मुकुल ने बताया कि उनके पापा बताते हैं कि UP के खिलाफ एक U-19 मैच हुआ था, जो एक कम स्कोर वाला मैच था, लेकिन उसके उन्होंने रन बनाए और तभी उन्हें यकीन हो गया कि वह आगे चलकर कुछ बड़ा करेंगे.
एक तनावपूर्ण चेज के दबाव के बावजूद मुकुल का माइंडसेट सिम्पल रहा. उनका कहना है कि दबाव तो हैं, मगर उन्हें लगता है कि ऊपर वाले ने उन्हें एक मौका दिया है, इसलिए वह बस अपनी काबिलियत पर भरोसा करते हैं. चेज के दौरान उनका नजरिया साफ था. वह आखिर तक टिके रहना चाहते थे.
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