स्टीफन फ्लेमिंग को 5 IPL ट्रॉफी जिताने के बाद भी किन कारणों से गंवानी पड़ी CSK की कुर्सी

स्टीफन फ्लेमिंग 2008 में सीएसके का हिस्सा बने थे और 2009 में हेड कोच बनाए गए थे. लेकिन हालिया समय में जिस तरह से चेन्नई सुपर किंग्स का खेल रहा था उससे उनकी कुर्सी खतरे में पड़ गई थी.

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स्टीफन फ्लेमिंग 2009 में सीएसके के हेड कोच बने थे. (Photo: Getty)

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स्टीफन फ्लेमिंग आईपीएल इतिहास के सबसे सफल और सबसे लंबे समय तक रहने वाले कोच हैं.

स्टीफन फ्लेमिंग चेन्नई के साथ ही सुपर किंग्स की दो दूसरी टी20 लीग की टीमों के भी हेड कोच रहे.

स्टीफन फ्लेमिंग 18 साल तक चेन्नई सुपर किंग्स के हेड कोच रहने के बाद हट गए. 13 जुलाई को यह फैसला हुआ. फ्रेंचाइज और पूर्व क्रिकेटर ने आपसी सहमति और ईमानदार समीक्षा के बाद ऐसा करने का कदम उठाया. फ्लेमिंग 2009 में सीएसके के हेड कोच बने थे. इससे पहले 2008 में जब आईपीएल शुरू हुआ था तब वे बतौर खिलाड़ी इस फ्रेंचाइज के साथ थे. फ्लेमिंग के कार्यकाल में सीएसके ने पांच बार आईपीएल तो दो बार चैंपियंस लीग टी20 का खिताब जीता. उनकी कोचिंग में यह टीम 11 बार प्लेऑफ तक पहुंची तो नौ बार फाइनल खेली.

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फ्लेमिंग आईपीएल इतिहास के सबसे सफल और सबसे लंबे समय तक रहने वाले कोच हैं. वे सुपर किंग्स की दो दूसरी टी20 लीग की टीमों के भी हेड कोच रहे. ऐसे में लगभग दो दशक तक इस फ्रेंचाइज के साथ रहने के बाद न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान के हटने के पीछे क्या वजह रही.

चेन्नई सुपर किंग्स का हालिया प्रदर्शन

पांच बार की आईपीएल विजेता चेन्नई सुपर किंग्स की टीम 2023 के बाद से प्लेऑफ में नहीं जा सकी है. 2024 में वह मामूली अंतर से चूकी. लेकिन 2025 में इतिहास में पहली बार यह टीम अंक तालिका में सबसे नीचे रही तो 2026 में भी उसकी पॉजीशन आठवीं रही. इस तरह लगातार तीन सीजन चेन्नई आईपीएल में प्लेऑफ नहीं खेल सकी. इससे पहले 2008 से लेकर 2023 तक (दो सीजन टूर्नामेंट से बाहर रहने से इतर) यह टीम केवल 2020 व 2022 को छोड़कर हर बार प्लेऑफ में गई थी. चेन्नई के हालिया प्रदर्शन ने फ्लेमिंग की काबिलियत पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लगा दिया था.

धोनी के बिना सीएसके का कमजोर प्रदर्शन

चेन्नई ने पांच बार आईपीएल ट्रॉफी जीती है. लेकिन यह कामयाबी महेंद्र सिंह धोनी के कप्तान रहने के दौरान हुआ. सीएसके की सफलता का पूरा श्रेय इसी सूरमा को मिला. जब धोनी कप्तानी से दूर हुए या नहीं खेले तब चेन्नई की टीम जूझती दिखी. 2022 में रवींद्र जडेजा कप्तान बने लेकिन टीम के खेल में गिरावट दिखी. जडेजा बीच सीजन हट गए और धोनी को फिर से कमान लेनी पड़ी. 2024 में धोनी हट गए और ऋतुराज गायकवाड़ को नेतृ्त्व दिया गया. सीएसके प्लेऑफ में नहीं जा सकी. 2025 में गायकवाड़ को चोट की वजह से हटना पड़ा. सीएसके फिर लीग स्टेज से बाहर हुई. 2026 में धोनी चोट की वजह से नहीं खेले और टीम से दूर रहे. चेन्नई प्लेऑफ की रेस में होने के बाद भी टीम सेलेक्शन, किलर पंच, रणनीतिक कमियों की वजह से बाहर हो गई. इन सबने फ्लेमिंग की कोचिंग की प्रतिष्ठा को काफी ठेस पहुंचाई.

सुपर किंग्स की बाकी दो टीमों का खिताब न जीत पाना

सुपर किंग्स की साउथ अफ्रीका की टी20 लीग (SA20) में जोबर्ग सुपर किंग्स और अमेरिका की मेजर लीग क्रिकेट (MLC) में टैक्सस सुपर किंग्स नाम से टीम है. 2023 से ये दोनों खेल रही है. लेकिन अभी तक ये दोनों टीमें खिताब नहीं जीत सकी है. SA20 में जोबर्ग ने चारों सीजन में प्लेऑफ तक का सफर तय किया. एक बार फाइनल में भी पहुंची. मगर खिताब दूर ही रहा. MLC में टैक्सस ने चार में से तीन पहले तीन सीजन में प्लेऑफ में जगह बनाई. 2026 में वह सबसे नीचे रहते हुए प्लेऑफ की रेस से दूर रह गई. इन टीमों के प्रदर्शन से भी फ्लेमिंग की खिताब जीतने की काबिलियत पर संदेह बढ़ा.

टी20 क्रिकेट के बदलाव में पीछे रहना

फ्लेमिंग की कोचिंग का तरीका परंपरागत रहा. टी20 का खेल और आईपीएल में पिछले कुछ सालों में तेजी से बदलाव आया. नए खिलाड़ियों के उभार, सपाट पिचों और इंपेक्ट प्लेयर नियम ने खेल को बहुत हद तक बदल दिया. दूसरी फ्रेंचाइज ने आक्रामक खेल और युवाओं पर भरोसा जताया. लेकिन फ्लेमिंग का भरोसा अनुभव और परंपरागत खेल पर बना रहा. 2025 के सीजन में इसी वजह से नए नामों को लेने की जगह विजय शंकर, दीपक हुड्डा, राहुल त्रिपाठी जैसे नामों को चुना गया. यह दांव नाकाम रहा. बाकी कोचिंग स्टाफ भी समय की जरूरत के हिसाब से खिलाड़ियों को ढाल पाने में नाकाम रहा.

ऑक्शन के दौरान खिलाड़ियों के सेलेक्शन पर सवाल

पिछले कुछ ऑक्शन में फ्लेमिंग ने जिस तरह के खिलाड़ियों को ऑक्शन में लिया उससे फ्रेंचाइज के रवैये पर सवाल उठ रहे थे. सुरेश रैना, अंबाती रायडू जैसे चेन्नई के पुराने खिलाड़ियों ने भी ऑक्शन में लगाए गए दांव पर सवाल उठाए. जैसे 2026 ऑक्शन में जैकब डफी जैसे गेंदबाज को नहीं लिया गया तो 2023 के बाद जॉश हेजलवुड को रिलीज कर दिया गया. कुछ प्रतिभाशाली और एक्साइटिंग नाम जो सीएसके के रडार पर थे वे दूसरी फ्रेंचाइज में चले गए. इससे टीम का नुकसान हुआ.

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