नई दिल्ली। भारतीय घरेलू क्रिकेट में दो साल बाद देश की सबसे बड़ी घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिता रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) का आगाज हो चुका है. जिसके पहले दिन टेस्ट टीम इंडिया (Team India) के मध्यक्रम के बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे (Ajinkya Rahane) ने अपने बल्ले से उन आलोचकों को करारा जवाब दे डाला है. जो उन्हें पिछले महीने तक भारत की टेस्ट टीम से बाहर करने की सोशल मीडिया पर मुहीम चला रहे हैं. अजिंक्य रहाणे (Ajinkya Rahane) ने चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) की सौराष्ट्र टीम के खिलाफ रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) के पहले दिन अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल स्टेडियम में शानदार शतक जड़ा, जिससे पृथ्वी शॉ (Prithvi Shaw) की कप्तानी वाली मुंबई ने मजबूत पकड़ बनाई.
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44 रन पर मुंबई के गिरे थे तीन विकेट
दरअसल, मुंबई के युवा कप्तान पृथ्वी शॉ ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया. हालांकि इसका फायदा सौराष्ट्र के गेंदबाजों ने उठाया और उन्होंने कप्तान पृथ्वी शॉ, आकर्षित गोमेल और सचिन यादव को सस्ते में चलता कर दिया. इस तरह एक समय मुंबई के 44 रन पर तीन विकेट गिर चुके थे. जिसके बाद रहाणे ने मुंबई के मध्यक्रम को संभालने का काम किया और सरफराज खान के साथ मिलकर दिन के अंत तक 219 रनों की साझेदारी करके मुंबई को शुरुआती झटकों से उबारा. रहाणे ने अपने शतक के दौरान 212 गेंदों में 100 रन की पारी खेली, जिसमें 14 चौके और दो छक्के शामिल हैं. जबकि दिन के अंत तक वह 250 गेंदों में 108 रन बनाकर नाबाद रहे. वहीं उनके साथ सरफराज ने भी 219 गेंदों में 121 रनों की शानदार शतकीय पारी खेली. जिसके चलते पहले दिन मुंबई ने सौराष्ट्र के खिलाफ तीन विकेट पर 263 रन बनाए और मैच में शिंकजा कस लिया. सौराष्ट्र के लिए जदेव उनादकट, चेतन सकारिया और चिराग जैनी ने एक-एक विकेट लिए.
अब पुजारा पर होंगी नजरें
बता दें कि रहाणे और पुजारा की तो साउथ अफ्रीका में बल्ले से फ्लॉप होने के बाद इन दोनों बल्लेबाजों को टीम से बाहर किए जाने की मांग तेजी से बढ़ रही थी. जिसके चलते टीम मैनेजमेंट ने इन्हें एक और अंतिम मौका देने की बात कही थी. साउथ अफ्रीका में पुजारा ने तीन टेस्ट मैचों की 6 पारियों में 20.6 की औसत से सिर्फ 124 रन बनाए. जबकि रहाणे की बात करें तो उनके नाम 22.6 की औसत से कुल 136 रन ही बना सके थे. ऐसे में श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले रहाणे के बल्ले से शतक निकलना उनकी अच्छी फॉर्म का संकेत हैं. हालांकि भारत के लिए वह पिछले दो साल से शतक नहीं जमा सके हैं. जबकि सौराष्ट्र की जब बलेबाजी आएगी तो पुजारा पर भी बड़ी पारी खेलने का दबाव होगा. उन्होंने भी साल 2019 से टीम इंडिया के लिए टेस्ट क्रिकेट में शतक नहीं जमाया है.
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