जम्मू-कश्मीर ने रणजी ट्रॉफी जीतकर इतिहास रच दिया है. जम्मू-कश्मीर की टीम पहली बार फाइनल में पहुंची थी और उसने पहली बार में ही अपना पहला खिताब भी जीत लिया. फाइनल में जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी की बढ़त के आधार पर कर्नाटक को मात दी. पहले बैटिंग करते हुए जम्मू-कश्मीर ने अपनी पहली पारी में 584 रन बनाए, जवाब में कर्नाटक की पहली पारी 293 रन पर ढेर हो गई थी और जम्मू- कश्मीर की टीम ने 291 रन की बढ़त हासिल कर ली.
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इसके बाद जम्मू-कश्मीर ने 5वें और आखिरी दिन के दूसरे सेशन में 4 विकेट पर 342 रन बनाकर अपनी दूसरी पारी घोषित की और इसी के साथ दोनों टीमों के कप्तान ड्रॉ पर राजी हो गए और पहली पारी में बढ़त के आधार पर जम्मू-कश्मीर ने ऐतिहासिक खिताब जीत 67 साल का इंतजार खत्म किया. जम्मू-कश्मीर अब रणजी चैंपियन बनने वाली 19वीं अलग टीम है. जम्मू-कश्मीर इससे पहले तीन बार 2013-14, 2019-20 और 2024-25 में क्वार्टर फाइनल में पहुंचा था. पिछली बार उनके खिलाफ केरल ने पहली पारी में एक रन की बढ़त लेकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी.
जम्मू-कश्मीर की जीत के हीरो
पहली पारी में बनाए गए 584 रन इस सीज़न में उसका सबसे बड़ा स्कोर था. शुभम पुंडीर और कामरान इकबाल ने इस कैंपेन में अपनी पहली सेंचुरी लगाई. जम्मू-कश्मीर के भरोसेमंद खिलाड़ी आकिब नबी भी इस जीत के हीरो रहे, जिन्होंने पहली इनिंग में जबरदस्त प्रदर्शन (54 रन देकर पांच विकेट) करके कर्नाटक के बैटिंग ऑर्डर को तहस-नहस कर दिया, जिससे वह इस रणजी ट्रॉफी में 60 विकेट लेकर सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए. जम्मू-कश्मीर की जीत का क्रेडिट मिडिल-ऑर्डर बल्लेबाज अब्दुल समद को भी जाता है. वह 748 रन बनाकर अपनी टीम के लिए सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने.
इसी के साथ जम्मू-कश्मीर के कप्तान पारस डोगरा का शानदार रेड-बॉल डोमेस्टिक करियर भी खत्म हो गया है. 41 साल के इस खिलाड़ी ने 153 फर्स्ट क्लास मैच खेले हैं. वह मुंबई के लेजेंड वसीम जाफर के बाद रणजी ट्रॉफी में 10,000 से ज़्यादा रन बनाने वाले दूसरे खिलाड़ी हैं.
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