जम्मू और कश्मीर के कप्तान 41 साल के पारस डोगरा ने इतिहास रच दिया है. वह भारतीय घरेलू क्रिकेट के दिग्गज वसीम जाफर के बाद रणजी ट्रॉफी के नौ दशक पुराने इतिहास में 10 हजार बनाने वाले सिर्फ दूसरे क्रिकेटर बन गए हैं. उन्होंने सोमवार को यह उपलब्धि हासिल की. जम्मू और कश्मीर की टीम रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल में बंगाल के सामने हैं. जम्मू और कश्मीर ने जब 13 रन पर अपने दो विकेट गंवा दिए थे, तो डोगरा नंबर चार पर बैटिंग के लिए आए. हालांकि शुभम पुंडीर जल्द ही आउट हो गए, लेकिन उन्हें अब्दुल समद का साथ मिला और दोनों ने रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में बंगाल के खिलाफ 50 रन की अहम पार्टनरशिप की.
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डोगरा ने अपनी पारी का 11वां रन बनाते ही यह उपलब्धि हासिल की. वह रणजी ट्रॉफी में 92 साल में 10 हजार रन पार करने वाले सिर्फ दूसरे बल्लेबाज बन गए.उन्होंने यह उपलब्धि अपने 147वें मैच में हासिल की. डोगरा से पहले सिर्फ जाफर ही इस मुकाम तक पहुंचे हैं और वह 12,038 रनों के साथ ऑल-टाइम चार्ट में सबसे ऊपर हैं.
26 साल पहले फर्स्ट क्लास सफर शुरू
डोगरा ने 2001 में हिमाचल प्रदेश के साथ अपना फर्स्ट-क्लास सफर शुरू किया था. उन्होंने टीम के लिए 95 रणजी ट्रॉफी मैच खेले और 6,418 से ज्यादा रन बनाए, जिसमें 19 शतक और 24 अर्धशतक शामिल हैं. इसके बाद वह 2018 में पुडुचेरी चले गए. वहां वह टीम के पहले रणजी ट्रॉफी शतक बनाने वाले खिलाड़ी बने और पांच सीजन में 11 शतक लगाए. 2024-25 कैंपेन से पहले वह जम्मू और कश्मीर चले गए और कप्तानी की जिम्मेदारी संभाली. इस सीजन में 500 रन के करीब वह बना चुके हैं और जम्मू और कश्मीर के दूसरे सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं. उन्होंने अपनी कप्तानी में टीम को पहली बार रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है.
डोगरा के नाम अब मौजूदा बैट्समैन में सबसे ज़्यादा रणजी ट्रॉफी सेंचुरी (33) बनाने का रिकॉर्ड है, जो सिर्फ जाफर के ऑल-टाइम 40 सेंचुरी से पीछे हैं. इस सप्ताह अपना 147वां गेम खेलते हुए डोगरा जाफर के बाद टूर्नामेंट के दूसरे सबसे ज़्यादा कैप्ड क्रिकेटर भी बन गए. जाफर 156 मैच खेले थे.
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