गौतम गंभीर ने देखा तक नहीं, न हैलो का जवाब द‍िया, टीम से बाहर किए जाने पर पूर्व चीफ सेलेक्टर का चौंकाने वाला खुलासा

पूर्व चीफ सेलेक्टर्स संदीप पाटिल ने बताया कि कैसे गंभीर ने उनसे बात करने से मना कर दिया है और उन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज किया, क्योंकि उन्हें भारतीय टीम से बाहर कर दिया गया था.

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गौतम गंभीर और संदीप पाटिल के बीच कभी अच्छी बॉन्ड‍िंग थी. (PC: Getty)

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गौतम गंभीर और संदीप पाटिल के बीच कभी अच्छी बॉन्ड‍िंग थी.

टीम से बाहर होने के बाद गंभीर की पाटिल के साथ रिश्ते खराब हो गए.

बीसीसीआई के पूर्व चीफ सेलेक्टर्स संदीप पाटिल ने अपने और भारतीय टीम के मौजूदा हेड कोच गौतम गंभीर के बीच खराब रिश्तों के बारे में खुलकर बात की है. इस हफ़्ते विक्की लालवानी शो में बात करते हुए पाटिल ने बताया कि कैसे गंभीर ने उनसे बात करने से मना कर दिया है और उन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज किया, क्योंकि उन्हें भारतीय टीम से बाहर कर दिया गया था. 

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पाटिल और गंभीर के बीच ये अनबन 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज से शुरू हुई थी. जब संदीप पाटिल की सिलेक्शन कमिटी ने उभरते हुए शिखर धवन के लिए गंभीर को बाहर करने का बड़ा फ़ैसला लिया. हालांकि धवन का डेब्यू आइकॉनिक था, मोहाली में 187 रन की जबरदस्त पारी खेली. लेकिन इसने इंडिया के सबसे शानदार ओपनर्स में से एक के अंत की शुरुआत का इशारा दिया. 

बातचीत तक बंद 


पाटिल के मुताबिक दोनों के बीच कभी बहुत गहरा रिश्ता था. उन्होंने कहा कि 

वह मुझे बहुत प्यारे थे. हम दौरे पर साथ में टेनिस खेलते थे और जब सालों पहले मुझे कोच के पद से हटा दिया गया था तो गौती हर दो हफ़्ते में हालचाल जानने के लिए मुझे फ़ोन करते थे. लेकिन जैसे ही गंभीर को बाहर का रास्ता दिखाया गया, वह गर्मजोशी गायब हो गई. पाटिल ने बताया कि नेशनल न्यूज चैनलों पर अलग-अलग टेलीविजन शो के लिए एक ही स्टूडियो स्पेस शेयर करने के बावजूद पूरी तरह से चुप्पी बनी हुई है. 

पाटिल ने कहा कि गंभीर अभी भी परेशान हैं. उन्होंने मुझसे कभी बात नहीं की. हम कई अलग-अलग शो में साथ आए हैं. हम एक ही कमरे में बैठे हैं, लेकिन गौतम ने कभी मेरी तरफ देखा तक नहीं. यह ठीक है. हर बार जब मैंने उनसे बात की या 'हैलो' कहा, तो उन्होंने कभी जवाब नहीं दिया. एक नजर भी नहीं डाली,लेकिन यह ठीक है. 

गंभीर को नहीं लगा कि दौर खत्म हो गया

पाटिल ने कहा कि जहां वीवीएस लक्ष्मण, राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर जैसे दूसरे दिग्गजों ने अपने जाने को खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया, वहीं गंभीर सही मायने में परेशान हैं, क्योंकि उन्हें कभी नहीं लगा कि उनका दौर खत्म हो गया है. गंभीर का इंटरनेशनल करियर बहुत शानदार रहा है. खासकर 2007 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल (75) और 2011 ODI वर्ल्ड कप फाइनल (97) में उनकी सबसे बड़ी पारियां. 

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