भारतीय महिला टीम ने बीती रात दुबई में श्रीलंका को हराकर एशिया कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया.हालांकि इसके बाद हरमनप्रीत कौर की टीम ने भारतीय पुरुष टीम वाला ही रुख अपनाते हुए एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के प्रेसिडेंट मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से मना कर दिया. भारतीय पुरुष टीम ने भी पिछले साल बिल्कुल ऐसा ही किया था.
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भारत ने एशिया कप ट्रॉफी ना लेने का फैसला क्यों किया? BCCI सेक्रेटरी ने बताई वजह
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार सोर्स का कहना है कि BCCI ने ACC अधिकारियों को फाइनल से पहले ही बता दिया था कि अगर नकवी प्रेजेंटेशन में शामिल होते हैं और भारत फाइनल जीतता है तो टीम उनसे ट्रॉफी नहीं लेगी. प्रेज़ेंटेशन शुरू होने से पहले भी काफी इंतजार करना पड़ा.श्रीलंका का आखिरी विकेट गिरने और सेरेमनी शुरू होने के बीच लगभग 40 मिनट का समय बीत गया था. सबसे पहले मैच अधिकारियों को मोमेंटोज दिए गए, जिसके बाद श्रीलंका की कप्तान चमारी अटापट्टु और उनकी टीम को रनर-अप मेडल दिए गए. इसके बाद अटापट्टु ने नकवी से रनर-अप का चेक लिया और फिर ब्रॉडकास्टर से बात की.
भारतीय पुरुष टीम ने भी नकवी से नहीं ली थी ट्रॉफी
टीम की जीत के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के हेड कोच अमोल मजूमदार ने कहा कि टीम नकवी से ट्रॉफी ना लेने के BCCI के फैसले के साथ खड़ी रही और चैंपियन बनने के बाद टूर्नामेंट को खत्म मान लिया गया. इस घटना ने पिछले साल सितंबर में इसी जगह पर हुए पुरुषों के एशिया कप फाइनल की यादें ताजा कर दीं. उस समय भारत ने नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था, जिसके कारण मैच खत्म होने के बाद भी प्रेजेंटेशन सेरेमनी एक घंटे से ज़्यादा खिंच गई.पुरुषों के एशिया कप फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को पांच विकेट से हराया था, जिसमें तिलक वर्मा 69 रन बनाकर नाबाद रहे थे. हालांकि जीत के बाद भी यह ड्रामा एक घंटे से ज़्यादा समय तक चलता रहा.
भारत ने नकवी से एशिया कप की ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया, जो पाकिस्तान के गृह मंत्री और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन भी हैं. यह टूर्नामेंट पहलगाम आतंकी हमले और फिर ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के माहौल में खेला गया था. टूर्नामेंट के दौरान हुई तीन मुलाकातों में भारत ने पाकिस्तान के खिलाड़ियों से हाथ मिलाने से भी इनकार कर दिया था.
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