बांग्लादेश को T20 वर्ल्ड कप 2026 से हटाए जाने के चार महीने बाद भी इस बात पर बहस जारी है कि टूर्नामेंट में हिस्सा न लेने का फैसला किसने किया था. जहां पूर्व अंतरिम खेल सलाहकार आसिफ नजरुल ने दावा किया था कि खिलाड़ियों और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने मिलकर हिस्सा न लेने का फैसला किया था, वहीं कप्तान लिटन दास ने एक बार फिर इस बात को नकार दिया है.
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यह विवाद तब शुरू हुआ जब बांग्लादेश ने तनाव के बीच भारत में खेलने को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जाहिर कीं. BCB ने ICC से अपने वर्ल्ड कप मैच भारत से बाहर कराने का अनुरोध किया, लेकिन गवर्निंग बॉडी को कोई सुरक्षा खतरा नजर नहीं आया और उसने मैचों की जगह बदलने से इनकार कर दिया. जब कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ, तो आख़िरकार बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को शामिल कर लिया गया.
पाकिस्तान के पिछले दौरों का ज़िक्र
सुरक्षा से जुड़े तर्क को चुनौती देते हुए लिटन ने बांग्लादेश के पाकिस्तान के पिछले दौरों का ज़िक्र किया, जहां सुरक्षा इंतजाम कहीं ज़्यादा कड़े थे.
उन्होंने कहा कि उन्होंने बस उनसे पूछा कि वह क्या चाहते हैं. अब एक खिलाड़ी के तौर पर आप क्या चाहेंगे? ज़ाहिर है, वे लोग लड़ना नहीं चाहते थे. वे सभी क्रिकेट खेलना चाहते थे, लेकिन उन्होंने भारत में सुरक्षा पर सवाल उठाए. लिटन दास ने आगे कहा कि उन्होंने कहा भी की वह पाकिस्तान में क्रिकेट खेले हैं, जहां वे कमरे के बाहर बंदूकें लेकर खड़े रहते थे. उससे ज़्यादा खतरनाक क्या हो सकता है? लेकिन यह उनका फ़ैसला था. खिलाड़ियों के तौर पर वर्ल्ड कप से हटने के फैसले में उन लोगों की इसमें कोई भूमिका नहीं थी.
मीटिंग में चाय पीने गए थे
जब उन्हें याद दिलाया गया कि आसिफ ने बॉयकॉट के लिए खिलाड़ियों और BCB को ज़िम्मेदार ठहराया था तो लिटन ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि क्या वह अभी किसी पद पर हैं? इसीलिए उन्होंने ऐसी बातें कहीं. बांग्लादेश के मीडिया आउटलेट 'प्रोथोम आलो' से बात करते हुए लिटन ने बताया कि खिलाड़ी कभी भी किसी असली फैसले लेने की प्रक्रिया में शामिल नहीं थे. जनवरी में सरकारी अधिकारियों के साथ हुई एक मीटिंग का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि टीम ने इसे सलाह-मशविरे के बजाय सिर्फ़ एक औपचारिकता माना था. उन्होंने कहा कि वहां कोई सवाल-जवाब नहीं हुआ. वह लोग तो बस वहां शामिल होने और चाय पीने गए थे. यह सिर्फ एक मीडिया स्टंट था. इसलिए उनकी सोच भी वैसी ही थी.
लिटन के मुताबिक खिलाड़ियों से उनकी राय पूछी गई थी, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया था कि वे वर्ल्ड कप में खेलना चाहते हैं. हालांकि भारत में सुरक्षा को लेकर जताई गई चिंताओं का इस्तेमाल उस फैसले को सही ठहराने के लिए किया गया, जो पहले ही दूसरों द्वारा लिया जा चुका था.
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