दिमाग तक फैला इंफेक्शन, वजन घटा, बातचीत भी लगभग बंद, दिल्ली के अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा अफगान गेंदबाज

जादरान शपूर HLH की गंभीर अवस्था में हैं और फिलहाल नई दिल्ली के एक अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में अपनी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं. वह जनवरी में इलाज के लिए दिल्ली आए थे.

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शपूर जादरान जानलेवा बीमारी HLH से जूझ रहे हैं (PC: Getty)

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शपूर जादरान जानलेवा बीमारी HLH से जूझ रहे हैं.

जादरान का इलाज दिल्ली में चल रहा है.

अफगानिस्तान के पूर्व बाएं हाथ के तेज गेंदबाज शपूर जादरान एक दुर्लभ और जानलेवा बीमारी हेमोफैगोसिटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (HLH) से जूझ रहे हैं.इस बीमारी में शरीर का इम्यून सिस्टम काम करना बंद कर देता है. शपूर HLH की गंभीर अवस्था में हैं और फिलहाल नई दिल्ली के एक अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में अपनी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं.वह जनवरी में इलाज के लिए दिल्ली आए थे. 

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6 फुट 2 इंच की लंबी कद-काठी वाले शपूर ने अपने करियर के दौरान एक से बढ़कर धुरंधर को अपनी गेंदबाजी से खौफ में ला द‍िया था, मगर आज वह ICU में HLH की चौथी स्टेज से जूझते हुए बिस्तर पर पड़े हैं. शपूर ने 2009 से 2020 के बीच अफगानिस्तान के लिए 80 इंटरनेशनल मैच (44 ODI और 36 T20I) खेले हैं.पिछले अक्टूबर में पहली बार उनकी तबीयत खराब हुई थी.उनके छोटे भाई घमाई जादरान ने बताया कि अफगानिस्तान के डॉक्टरों ने उन्हें इलाज के लिए भारत जाने को कहा था. 

जय शाह से मांगी थी मदद
 

घमाई ने बताया कि राशिद खान और अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) के चेयरमैन मीरवाइस अशरफ ने भारत में अपने जान-पहचान वालों से मदद मांगी, जिसके बाद शपूर का भारतीय वीजा जल्दी मिल गया.अशरफ ने ICC के चेयरमैन जय शाह से बात की.वहीं राशिद ने फ्रेंचाइज में अपने जान पहचान वालों से संपर्क किया. शपूर 18 जनवरी को भारत पहुंचे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. 

पूरे शरीर में इन्फेक्शन

क्रिकइंफो के अनुसार घमाई ने बताया कि यह एक बहुत ही गंभीर इन्फेक्शन था.उनके भाई का पूरा शरीर इन्फेक्शन से भरा हुआ था, जिसमें TB (तपेदिक) भी शामिल था. यह उनके दिमाग तक भी फैल गया था,जिसका पता MRI और CT स्कैन के बाद चला.घमाई ने बताया कि शपूर इलाज पर र‍िएक्ट देने लगे थे और कुछ सप्ताह बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई.इसके बाद ग्रुप पास के ही एक होटल में चला गया, क्योंकि  उन्हें लगातार चेक अप कराने थे. घमाई ने बताया कि इंफेक्शन वापस फैलने से पहले करीब 20 दिन तक उनके भाई को अच्छा महसूस हो रहा था, मगर उनहें वापस से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. 

डेंगू टेस्ट पॉजिटिव


करीब 20 दिनों के बाद उन्हें फिर से डिस्चार्ज कर दिया गया, लेकिन फिर उन्होंने पेट खराब होने की शिकायत की और जादरान को फिद से अस्पताल ले जाया गया और इसके बाद उनकी हालत और बिगड़ गई. घमाई ने बताया कि उनके भाई को बुखार आने लगा और फिर डेंगू टेस्ट पॉजिटिव आया.उनकी इम्यूनिटी बहुत कमजोर हो गई थी, क्योंकि रेड ब्लड सेल्स की संख्या बहुत ज़्यादा घट गई थी. 26 मार्च के आसपास रमजान के महीने के दौरान शापूर का बोन-मैरो टेस्ट हुआ, जिससे पता चला कि वह HLH के चौथे चरण में थे. घमाई ने बताया कि  इस समय जादरान मुश्किल से ही कुछ बोल पाता है और ज्यादातर सोते रहते हैं.उनका वजन भी लगभग 14 किलो कम हो गया है. उनमें अब ज़्यादा जान नहीं बची है. 

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