जहीर खान CSK के हेड कोच अचानक से कैसे बने, धोनी का क्या रहा रोल, कहां पिछड़े हेमांग बदानी

जहीर खान के चेन्नई सुपर किंग्स का हेड कोच बनने में महेंद्र सिंह धोनी की अहम भूमिका रही. उन्होंने ही टीम इंडिया के अपने पूर्व साथी का नाम सुझाया था. इसके साथ भी कुछ चीजें रहीं जो जहीर के पक्ष में गईं.

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zaheer khan

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जहीर खान को एक साल यानी आईपीएल 2027 तक का कॉन्ट्रेक्ट दिया गया है.

स्टीफन फ्लेमिंग के इस्तीफे के चलते सीएसके के हेड कोच का पद खाली हुआ था.

जहीर खान चेन्नई सुपर किंग्स के हेड कोच नियुक्त किए गए हैं. उन्हें आईपीएल 2027 से पहले यह जिम्मेदारी मिली है. जहीर खान, स्टीफन फ्लेमिंग के जाने से खाली हुई जगह को भरेंगे. बाएं हाथ के पूर्व तेज गेंदबाज का सीएसके का हेड कोच बननाा चौंकाने वाली अपडेट है. उनके नाम का किसी ने अनुमान नहीं लगाया था. उनके अलावा हेमांग बदानी, ऑएन मॉर्गन जैसे नाम चल रहे थे. लेकिन जहीर ने बाजी मारी. इसमें महेंद्र सिंह धोनी की अहम भूमिका रही. जहीर के सीएसके से जुड़ने की इनसाइड स्टोरी सामने आई है.

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जानकारी मिली है कि सीएसके की क्रिकेट मैनेजमेंट कमिटी चाहती थी कि इस बार भारतीय को कोच बनाया जाए. इस कमिटी में पूर्व कप्तान धोनी, कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ और मालिक रूपा गुरुनाथ शामिल है. धोनी ने इस बात पर जोर दिया था कि किसी ऐसे को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए जिससे जान-पहचान हो. उन्होंने ही जहीर का नाम सुझाया था. उन्होंने पिछले कुछ दिनों में सभी उम्मीदवारों से बात की थी. इसके बाद जहीर के नाम पर मुहर लगी.

सीएसके के सीईओ ने बताई जहीर के हेड कोच बनने की कहानी

सीएसके के सीईओ काशी विश्वनाथन ने दी इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, 'एमएस ने ही जहीर के नाम का सुझाव दिया था. इस पर क्रिकेट मैनेजमेंट कमिटी ने सहमति दी. उनके पास आईपीएल में काम करने का अनुभव है. इसे ध्यान में रखते हुए हमें लगा कि वह सही विकल्प है. हमें जहीर से बेहतर कोच नहीं मिल सकता था. उन्हें इस भूमिका के लिए राजी करने में थोड़ा समय लगा.' 

जहीर खान को एक साल का कॉन्ट्रेक्ट दिया गया है. इसे आगे बढ़ाया जा सकता है. सीएसके ऐसा कोच चाहती थी जिसका पूरा फोकस आईपीएल पर ही रहे. उसका किसी दूसरी टी20 लीग से संबंध न हो. जहीर के पक्ष में उनका शांत रवैया, संयमित बर्ताव और काम करने की शैली भी गई. 

हेमांग बदानी क्यों नहीं बन पाए हेड कोच

हेमांग बदानी भी कोच बनने के मुख्य दावेदार थे. लेकिन दिल्ली कैपिटल्स के साथ उनका कार्यकाल खिलाफ गया. वे दो सीजन तक इस फ्रेंचाइज के हेड कोच थे. लेकिन दिल्ली का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा. वहीं इंग्लैंड के पूर्व कप्तान मॉर्गन का नाम भी रेस में बताया जा रहा था. लेकिन सीएसके के भारतीय को ही कोच बनाने की नीति के चलते वे इस होड़ से बाहर हो गए.

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