इशान किशन की अगुआई वाली ईस्ट जोन ने 13 साल बाद दलीप ट्रॉफी जीतकर इतिहास रच दिया है. इशान और वैभव सूर्यवंशी से सजी इस टीम ने साउथ जोन का ख्वाब तोड़ दिया. ईस्ट जोन ने पहली पारी में बढ़त के आधार पर फाइनल जीता. ईस्ट जोन ने कप्तान इशान के दोहरे शतक की बदौलत पहली पारी में 708 रन बना डाले थे, जिसके जवाब में साउथ जोन की टीम पहली पारी में 336 रन ही बना पाई और मुकाबले में पिछड़ गई. 5वें और आखिरी दिन ईस्ट जोन ने सात विकेट पर 388 रन बनाकर अपनी दूसरी पारी घोषित की और इसी के साथ दोनों टीमें ड्रॉ पर सहमत हो गई.फाइनल में पहली पारी में 270 रन और दूसरी पारी में 80 रन बनाने वाले इशान किशन प्लेयर ऑफ द मैच रहे, जबकि कुल 266 रन बनाने वाले साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा प्लेयर ऑफ द सीरीज रहे.
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ईस्ट जोन की दूसरी पारी में कोनैन कुरैशी ने अपना पहला फ़र्स्ट-क्लास शतक लगाया.कोनैन कुरैशी के लिए एक अहम उपलब्धि है.उन्होंने अपना पहला फ़र्स्ट-क्लास शतक जड़ा है. वह आखिर तक क्रीज पर टिके रहे. उन्होंने नॉटआउट 116 रन की पारी खेली. उनके अलावा ईस्ट जोन के लिए दूसरी पारी में शिखर मोहन ने 52 रन, कप्तान इशान ने 80 रन, अनुकूल रॉयल ने 64 रन और कुमार कुशाग्र ने 46 रन बनाए. उन्होंने पहली पारी में भी 101 रन बनाए थे. पहली पारी में 44 रन बनाने वाले वैभव सूर्यवंशी दूसरी पारी में सिर्फ आठ रन ही बना पाए.
साउथ जोन की दिशाहीन गेंदबाजी
हालांकि दोनों टीम के खिलाड़ियों के दोपहर दो बजकर 10 मिनट पर हाथ मिलाने और मैच ड्रॉ घोषित होने से काफी पहले ही पूर्व क्षेत्र ने पहली पारी में 708 रन बनाकर खिताब लगभग तय कर लिया था. इस विशाल स्कोर की बदौलत टीम ने पहली पारी में 372 रन की बढ़त हासिल की थी.पांच विकेट पर 212 रन से दिन की शुरुआत करने वाली इशान किशन की टीम को पहली पारी की तरह ही दिशाहीन गेंदबाजी कर रहे साउथ जोन के गेंदबाज अधिक परेशान नहीं कर पाए. अनुभवी मोहम्मद सिराज कुछ समय के लिए पूरे जोश, तेजी और आक्रामकता के साथ गेंदबाजी करने आए.सिराज को दूसरे छोर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिला और साउथ जोन का कमजोर बल्लेबाजी प्रदर्शन भी उसके टीम चयन की खामियों को उजागर करता है.
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