इंग्लैंड में वनडे सीरीज हारने के बाद भारत के वनडे और टेस्ट कप्तान शुभमन गिल ने अपनी टीम के फिटनेस स्टैंडर्ड्स पर चिंता जताई थी. पिछले एक साल में सीरीज से पहले या उसके दौरान कई खिलाड़ियों के चोटिल होने की वजह से टीम को बार-बार मुश्किलों का सामना करना पड़ा है. गिल की बातों से भारतीय टीम मैनेजमेंट और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के बीच तालमेल पर बने सिस्टम की कमियां सामने आई हैं. कुछ समय पहले तक 2023, 2024 और 2025 में होने वाले तीन ICC इवेंट्स के लिए भारत के सभी अहम खिलाड़ी फिट और उपलब्ध थे. टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार पिछले साल स्टाफ में बदलाव के बाद कुछ सीनियर खिलाड़ियों को नए सिस्टम के हिसाब से ढलने में परेशानी हो रही है. सबसे चिंता की बात हैमस्ट्रिंग की चोटों का बार-बार होना है.
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बीसीसीआई के सोर्स का कहना है कि हाल में हैमस्ट्रिंग की चोटों के कई मामले सामने आए हैं, जिससे लगता है कि खिलाड़ी मैदान पर उतरने से पहले पूरी तरह फिट नहीं थे. ऐसा लगता है कि CoE और टीम मैनेजमेंट के बीच खिलाड़ी की फिटनेस और वर्कलोड को लेकर बातचीत में कोई कमी रही है. नितिन पटेल के जाने के बाद से CoE ने मेडिकल स्टाफ के हेड की नियुक्ति नहीं की है. सोर्स का कहना है कि 2023 में बनाए गए SOPs में कोई अपडेट नहीं किया गया है. सोर्स का कहना है कि डेटा इकट्ठा करना तो ज़्यादा मज़बूत हो गया है, लेकिन उस पर कार्रवाई धीमी हो गई है.
नीतीश कुमार रेड्डी पर दवाब
राहुल द्रविड़ के हेड कोच रहने के दौरान BCCI की मेडिकल टीम, CoE और टीम मैनेजमेंट ने बड़े ICC इवेंट्स के लिए हर खिलाड़ी के लिए साल भर का रोडमैप तैयार किया था. जिसका मकसद यह था कि हर खिलाड़ी अगले ICC टूर्नामेंट या बड़ी टेस्ट सीरीज के लिए समय पर जरूरी फ़िटनेस लेवल तक पहुंच जाए. हर्षित राणा और नीतीश कुमार रेड्डी को बार-बार चोट लगने से BCCI खुश नहीं है. सोर्स का कहना है कि चोट लगने के शिकार रहने वाले हार्दिक पंड्या की कमी पूरी करने के लिए रेड्डी पर 140kmph की रफ़्तार से गेंदबाज़ी करने का दबाव डाला जा रहा था. सोर्स ने खुलासा किया है कि रेड्डी ने अपनी रफ़्तार बढ़ाने के लिए इंग्लिश बॉलिंग कोच स्टीफन जोन्स के साथ काम किया, लेकिन जब वह किसी बड़े इवेंट से पहले टीम के साथ हों, तो यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होनी चाहिए. इसके बजाय जब भी वह टीम के साथ होते हैं, तो वह तेजी से गेंदबाज़ी करने के लिए खुद पर दबाव डालते हैं.
आधी-अधूरी फिटनेस के साथ मिली मंजूरी
रिपोर्ट में आगे खुलासा किया कि टीम मैनेजमेंट के कहने पर CoE ने हर्षित को तब मंजूरी दे दी, जब उन्होंने घुटने की चोट से पहले वाला वजन हासिल नहीं किया था. आकाश दीप पिछले साल IPL में चोट से लौटने के बाद लगातार दो टेस्ट मैचों का बोझ नहीं झेल पाए. सोर्स ने बताया कि पिछले साल इंग्लैंड में टेस्ट मैचों के बीच आकाश को हैमस्ट्रिंग की चोट लगी थी. फिर उन्हें घरेलू क्रिकेट खेलने की मंजूरी दी गई. वह तब तक खेले जब तक बंगाल रणजी सेमीफाइनल नहीं हार गया और तब से वह स्ट्रेस फ़्रैक्चर के कारण बाहर हैं. CoE को यह देखना होगा कि ऐसा क्यों हो रहा है. गिल की बात है तो इंग्लैंड में हाल में हुई ODI सीरीज में दो मैचों में 50 रन बनाने के बाद उन्हें भी हैमस्ट्रिंग की समस्या का सामना करना पड़ा.
रिपोर्ट के अनुसार कई खिलाड़ी इस बात को लेकर परेशान हैं कि जब वे नेशनल टीम के साथ यात्रा नहीं कर रहे होते हैं, तो BCCI की मेडिकल टीम से बहुत कम बातचीत हो पाती है. टीम मैनेजमेंट वाशिंगटन सुंदर के बार-बार चोटिल होने को लेकर भी चिंतित है. माना जाता है कि रेड्डी, राणा और वाशिंगटन युवा होने के बावजूद चोटों से उबरने में फिजियो के साथ काफी समय बिताते हैं. संजू सैमसन का आसानी से वजन बढ़ना भी चिंता की बात है. सोर्स का कहना है कि यह सिस्टम में कमी का नतीजा है. इन फिटनेस समस्याओं के कारण फील्डिंग का ओवरऑल स्टैंडर्ड गिर गया है.
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