भारत इस साल मार्च में अहमदाबाद में न्यूजीलैंड को हराकर लगातार दूसरी बार टी20 वर्ल्ड चैंपियन बना था. पिछली बार रोहित शर्मा ने भारत को चैंपियन बनाया था तो इस बार सूर्यकुमार यादव ने उस ताज को बरकरार रखा. फाइनल में सूर्या का बल्ला तो नहीं चला और जीरो पर आउट हो गए थे, मगर उनकी रणनीति ने भारत को 96 रन से बड़ी जीत दिला दी. पूरा स्टेडियम सूर्या के नाम से गूंज उठा था, पूरा देश उनके नाम के नारे लगा रहा था, मगर जब यह जश्न और उनके नाम का शोर थमा, तो उसके बाद उनके लिए सब कुछ बदल गया. पहले उनके हाथों से टीम इंडिया की कप्तानी गई और टीम इंडिया से भी बाहर हो गए थे. BCCI की सिलेक्शन कमिटी ने सूर्या को T20 सेटअप से हटा दिया और उनकी जगह श्रेयस अय्यर को चुना. वर्ल्ड कप फाइनल भारत के लिए खेला गया सूर्या का पिछला मैच था. उसके बाद वह अभी तक टी20 टीम में वापसी नहीं कर पाए. इस झटके के बाद अब उनकी मुंबई की रणजी टीम से भी छुट्टी हो गई है.
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मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने सीजन के पहले मैच के लिए अपनी 16 खिलाड़ियों वाली रणजी टीम में युवा आयुष म्हात्रे को उप-कप्तान बनाया गया है और सूर्यकुमार यादव को टीम में शामिल नहीं किया है, जबकि इस अनुभवी खिलाड़ी ने एक सप्ताह पहले ही अपनी उपलब्धता की पुष्टि कर दी थी. सूर्या और यशस्वी जायसवाल दोनों ने ही पैनल को अपनी उपलब्धता के बारे में बताया था, लेकिन लिस्ट में सिर्फ़ यशस्वी का ही नाम है. टीम की कप्तानी सिद्धेश लाड करेंगे. मुंबई 11 से 14 अक्टूबर तक वानखेड़े स्टेडियम में अपने सीज़न के पहले मैच में चंडीगढ़ का सामना करेगी.
सूर्या को मुंबई की टीम में क्यों नहीं मिला मौका
चीफ सेलेक्टर राजेश पवार का कहना है कि हाल के दिनों में रेड-बॉल मैच की प्रैक्टिस ना होने की वजह से सूर्या को टीम में शामिल नहीं किया गया. सूर्या ने पिछले 18 महीनों से कोई रेड-बॉल मैच नहीं खेला है, इसलिए सेलेक्टर्स चाहते हैं कि वह कुछ मैच खेल लें और फिर टीम में शामिल हो सकें. क्रिकबज के अनुसार कि चयनकर्ता म्हात्रे को भविष्य के कप्तान के तौर पर तैयार करना चाहते हैं और अपनी कप्तानी में भारत को अंडर-19 वर्ल्ड कप का खिताब जिताने वाले 19 साल के म्हात्रे इस योजना के लिए बिल्कुल सही हैं. उन्होंने दो साल में सिर्फ़ 13 फ़र्स्ट-क्लास मैच खेले हैं. रिपोर्ट के अनुसार सूर्या ने राजेश पवार की अगुआई वाली मुंबई सिलेक्शन कमिटी को एक मैसेज भेजा था. हालांकि उन्हें टीम में शामिल करने पर विचार नहीं किया गया.
सूर्या का लेकर दावा
वहीं इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार पिछले सप्ताह ही सूर्या से रणजी ट्रॉफी खेलने की उनकी उपलब्धता और इच्छा के बारे में पूछा गया था और उन्होंने कन्फर्म करने में एक दिन का समय लिया था. हालांकि MCA अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने कई बार उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने उनके कॉल का कोई जवाब नहीं दिया.
मुंबई टीम: सिद्धेश लाड (कप्तान), आयुष म्हात्रे (उप-कप्तान), शम्स मुलानी, यशस्वी जयसवाल, तनुष कोटियन, अथर्व अंकोलेकर, दिव्यांश सक्सेना, तुषार देशपांडे, मुशीर खान, मोहित अवस्थी, सरफराज खान, सिल्वेस्टर डिसूजा, सुवेद पारकर, ओंकार तरमाले, आकाश आनंद (विकेटकीपर), हार्दिक तमोरे (विकेटकीपर)।
भारत ने सूर्या से आगे बढ़ने का फैसला क्यों लिया?
सूर्या इस समय भारतीय टीम का हिस्सा नहीं है. दरअसल टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बाद उनसे आगे बढ़ने का फैसला खिलाड़ियों की फॉर्म और अगले वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. आयरलैंड और इंग्लैंड सीरीज के लिए भारत की T20I टीम का ऐलान करने के बाद चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर ने कहा था कि ज़्यादातर वर्ल्ड कप के बाद ऐसा ही होता है, हम यह दोबारा सोचते हैं कि आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका क्या है. उन्होंने कहा कि यह कुछ हद तक उनके अपने फ़ॉर्म की वजह से था, लेकिन अगले दो साल के साइकल (यानी अगले वर्ल्ड कप तक दो साल से थोड़ा ज़्यादा समय) को देखते हुए उन्हें लगा कि आगे बढ़ने का यही सबसे अच्छा तरीका है.
नंबर 4 पर सूर्या का प्रदर्शन
सूर्या से आगे बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह उनका प्रदर्शन भी रहा है. 2022 और 2023 की शुरुआत के बीच T20 क्रिकेट में शायद ही कोई बल्लेबाज़ उनसे ज़्यादा खतरनाक रहा हो. सिर्फ 2022 में उन्होंने इंटरनेशनल टी20 क्रिकेट में 48.2 के औसत और 187 के स्ट्राइक रेट से 1158 T20I रन बनाए. इसके बाद 2023 में उन्होंने 48.9 के औसत से 733 रन बनाए. उन दो सीजन में उनका औसत 48.5 और स्ट्राइक रेट 173.6 रहा, मगर 2023 के बाद से सूर्या का यह अंदाज लगातार देखने को नहीं मिला है. 2024-2026 ds के बीच उनका औसत गिरतर 25.8 तक पहुंच गया. स्ट्राइक रेट भी 173.6 से गिरकर 147.8 तक चली गई.
2025 में प्रदर्शन का ग्राफ तेजी से गिरा
किसी भी खिलाड़ी के एक खराब सीरीज या एक खराब टूर्नामेंट को नजरअंदाज़ किया जा सकता है, लेकिन एक चिंताजनक ट्रेंड को नज़रअंदाज करना मुश्किल था. 2024 के बीच में सूर्या का प्रदर्शन जो गिरना शुरू हुआ था, उस प्रदर्शन का ग्राफ 2025 में और तेजी से गिरने लगा. यह गिरावट हर जगह दिख रही है. उनका औसत लगभग आधा हो गया है, स्ट्राइक रेट तेजी से गिरा है, और छक्के लगाने की फ़्रीक्वेंसी भी कम हुई है. सबसे अहम बात यह है कि वह अच्छी शुरुआत को मैच जिताने वाली पारियों में नहीं बदल पा रहे थे.
यह गिरावट 2025 में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई्. 20 टी20 पारियों में सूर्यकुमार 13.8 के औसत से सिर्फ़ 221 रन बना पाए और एक भी अर्धशतक नहीं लगा सके. भारत के अहम मिडिल-ऑर्डर बैटर के लिए इन आंकड़ों को नजरअंदाज करना नामुमकिन है.
कप्तान बनने के बाद से प्रदर्शन
सूर्यकुमार की कप्तानी में भारत ने निश्चित रूप से 2025 में एशिया कप और 2026 में T20 वर्ल्ड कप जीता. जीत का प्रतिशत 77 फीसदी के करीब रहा, मगर बल्लेबाज के तौर पर वह संघर्ष ही करते नजर आए. जुलाई 2024 में कप्तान बनने के बाद से उन्होंने 52 मैचों में 28.65 की औसत से 1232 रन बनाए और जिस नंबर 4 की पोज़िशन को सूर्यकुमार यादव ने अपना बना लिया था, उसके लिए अब नए खिलाड़ी आ चुके हैं. श्रेयस अय्यर के कप्तान के तौर पर टीम में आने से वे भारत के नए नंबर 4 हैं, लेकिन सूर्या अय्यर के आने से पहले ही अपने साथी खिलाड़ियों से पीछे छूट गए थे. जनवरी 2024 से नंबर 4 पर बैटिंग करते हुए तिलक वर्मा का T20I में औसत 50.5 है, जबकि सूर्यकुमार का औसत 26.6 है. जीत के मामलों में यह अंतर और भी बढ़ जाता है. तिलक का औसत लगभग दोगुना है. 2024 के बाद शिवम दुबे ने भी उनसे बेहतर प्रदर्शन किया है. इसलिए चयनकर्ता ऐसे खिलाड़ियों पर फोकस कर रहे हैं, जो साफ तौर पर भारत के लिए सबसे अच्छा विकल्प बना हुए हैं.
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