भारत के मैच विनिंग गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के बचपन के कोच ने खुलासा किया है कि वह पहले क्रिकेट को लेकर गंभीर नहीं थे. वह एक दिन प्रैक्टिस करते थे तो अगले तीन दिन चिल करते थे. बुमराह को 16 साल की उम्र में कोचिंग देने वाले किशोर त्रिवेदी ने यह खुलासा किया. इंडिया टुडे से बातचीत में उन्होंने कहा कि जब बुमराह 16 साल के थे तो वह एक दिन उनके पास आए और उनके एकेडमी में एडमिशन लिया. बुमराह उस समय ज्यादातर स्कूल क्रिकेट खेल रहे थे और इसके लेकर वो ज्यादा सीरियस नहीं थे.
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उन्होंने कहा कि उस दिनों उन्होंने बुमराह को कुछ दिन तक देखा और फिर उनसे कहा कि अगर वह क्रिकेट को लेकर सीरियस होना चाहता है, तो उन्हें रेगुलर आना होगा और खेल को सही समय देना होगा. आप एक दिन प्रैक्टिस करके अगले तीन दिन तक गायब नहीं रह सकते. कोच ने उनसे कहा कि उनमें टैलेंट है और अगर वह चाहे, तो वह सबसे ऊंचे लेवल पर खेल सकते हैं.
नेट्स के पीछे खड़े रहने को कहते
जब भी बुमराह प्रैक्टिस मिस करते तो किशोर अक्सर उनसे पूरे दिन नेट्स के पीछे खड़े रहने को कहते थे. त्रिवेदी ने कहा कि बुमराह काफी शरारती लड़के थे. वह एक दिन ट्रेनिंग के लिए आते, अगले तीन दिन छोड़कर अपने दोस्तों के साथ चिल करने चले जाते. अगले दिन वह आते तो वह उन्हें पूरे दिन नेट्स के पीछे खड़ा रखते. ऐसा कई बार हुआ और फिर वह लाइन में लग गए. बुमराह को एहसास हुआ कि वह ऐसा नहीं कर सकते.
त्रिवेदी ने खुलासा किया कि उन्होंने बुमराह के अनोखे एक्शन के साथ छेड़छाड़ नहीं की, बल्कि उनके स्किलसेट को बेहतर बनाने पर काम किया. त्रिवेदी ने कहा कि बुमराह का एक्शन उनका सबसे बड़ा हथियार था. उन्हें वैरिएशन सीखने की जरूरत थी, और उन्हें अपने बेसिक्स पर काम करने की जरूरत थी शॉर्ट बॉल, यॉर्कर, कटर, वगैरह.
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