संजू सैमसन ने भारत को टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई. रविवार को ईडन गार्डन्स में T20 वर्ल्ड कप के आखिरी सुपर आठ मुकाबले में भारत ने वेस्ट इंडीज को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई. सैमसन ने उस मैच में अपने करियर की सबसे बेहतरीन पारियों में से एक खेली. उन्होंने 50 गेंदों में नॉटआउट 97 रन बनाए. जिसके बाद उन्होंने कहा कि उनके करियर में बहुत उतार-चढ़ाव आए. एक समय ऐसा भी था कि वो खुद पर करते रहे कि क्या वह कभी यह कर पाऊंगे. वह 60 टी20 मैच खेले हैं और 100 मैचों में बाहर रहे हैं. इस तरह के करियर से किसी की भी हिम्मत जवाब दे सकती है, लेकिन सैमसन ने हार नहीं मानी.
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सैमसन का क्रिकेट सफर नॉर्थ दिल्ली के GTB नगर की पुलिस कॉलोनी में शुरू हुआ था. उनके पिता सैमसन विश्वनाथन दिल्ली पुलिस कॉन्स्टेबल के तौर पर काम करते थे. वह एक फ़ुटबॉलर भी थे, जो संतोष ट्रॉफ़ी में दिल्ली के लिए खेले. संजू सैमसन के पिता ने बताया कि दिल्ली के एक जूनियर टूर्नामेंट में उनके बेटे ने आठ मैचों में 500 से ज़्यादा रन बनाए थे और इसके बावजूद उनके बेटे को अंडर 13 टीम में जगह नहीं मिली. उस दिन संजू रोते हुए उनके पास आए थे.
बेटे के लिए समय से पहले लिया रिटायरमेंट
भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज के पिता ने बताया कि एक दोपहर, जब उन्होंने अपने बेटे को ट्रेनिंग करते हुए देख रहे थे, तो एक राहगीर ने मजाक उड़ाया कि क्या वह अपने बेटे को श्रीलंकाई टीम में डालने का प्लान बना रहे हो?
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार सैमसन ने बताया कि लोग बहुत कुछ कहते हैं. एक पेरेंट के तौर पर वह उनका काम है कि वह अपने बेटे को बेस्ट दें. सैमसन को एहसास हुआ कि दिल्ली की रणजी ट्रॉफी टीम में जगह बनाना बहुत मुश्किल होगा. उन्होंने वॉलंटरी रिटायरमेंट ले लिया और तिरुवनंतपुरम लौट आए. शोर और हंसी-मजाक से दूर संजू ने अपना गेम फिर से बनाया और फिर यहीं से उनक किस्मत भी पलटी.
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