इस चर्चा में 2002 नेटवेस्ट ट्रॉफी के ऐतिहासिक फाइनल मुकाबले का विश्लेषण किया गया है। 325 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए शीर्ष पांच प्रमुख बल्लेबाजों के आउट होने के बाद टीम पर बने दबाव और वहां से मैच पलटने की स्थिति पर बात की गई। इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स के मैदान पर मिली इस जीत ने खिलाड़ियों और युवाओं में यह विश्वास जगाया कि भारतीय टीम विदेशी जमीन पर भी बड़ा मुकाबला जीत सकती है। इस मुकाबले को भारतीय क्रिकेट में आत्मविश्वास और सोच में आए बड़े बदलाव के रूप में रेखांकित किया गया है।
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