मुंबई की टीम इस बार विजय हजारे ट्रॉफी में कमाल कर रही है. कई यादगार जीत हासिल की हैं, खासकर सरफराज खान और उनके छोटे भाई मुशीर की बल्लेबाजी की वजह से. पिछले मैच में सरफराज ने गोवा के खिलाफ सिर्फ 57 गेंदों में शानदार शतक ठोका और फिर 75 गेंदों पर 157 रन बनाकर आउट हुए. उसी मैच में मुशीर ने भी बढ़िया अर्धशतक लगाया. दोनों भाई मुंबई के लिए एक साथ खेल रहे हैं, इसलिए सरफराज से पूछा गया कि भाई के साथ खेलना कैसा लगता है.
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भाई पर मुझे गुस्सा आता है: सरफराज
सरफराज ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, “हम लोग सालों से साथ खेलते आए हैं, इसलिए एक-दूसरे के खेलने की स्टाइल बहुत अच्छे से समझते हैं. हम एक-दूसरे की अच्छाई और गलतियों से सीखते हैं. मुशीर मुझसे काफी छोटा है, लेकिन उसकी सलाह बहुत काम की होती है क्योंकि वह अलग तरीके से सोचता है.” बड़े भाई होने के बावजूद सरफराज मुशीर की बातों को गंभीरता से लेते हैं. हालांकि कभी-कभी उन सलाहों से उन्हें गुस्सा भी आ जाता है.
सरफराज ने बताया, “जब हम दोनों बीच में बल्लेबाजी कर रहे होते हैं, तो लगातार बातें करते रहते हैं. किस गेंदबाज को कैसे खेलना है, पारी को कैसे आगे बढ़ाना है. मुशीर मुझे हर समय कुछ न कुछ बताता रहता है. कभी-कभी गुस्सा आ जाता है, लेकिन मैं उसकी बातों को हल्के में नहीं लेता.” सरफराज ने आखिरी बार भारत के लिए नवंबर 2024 में खेला था. गोवा के खिलाफ मैच में जब वे बल्लेबाजी करने आए, तो मुंबई की हालत थोड़ी नाजुक थी. लेकिन दोनों भाइयों ने मिलकर टीम को संभाल लिया और शानदार तरीके से आगे बढ़ाया.
सरफराज ने कहा, “जब मैं क्रीज पर पहुंचा, तो रन रेट ज्यादा नहीं था क्योंकि दोनों सलामी बल्लेबाजों ने शुरुआती मुश्किल घंटे को संभाल लिया था. सुबह के समय गेंद थोड़ी हिलती है, इसलिए खेलना आसान नहीं होता.” “मैं पहले थोड़ा सेट हुआ, फिर जैसे-जैसे पिच आसान हुई, हमला कर दिया. प्लान था कि जितने हो सके रन बनाओ और बड़ा स्कोर खड़ा करो. जब तक मैं आया, मुशीर बहुत अच्छी बल्लेबाजी कर रहा था.”
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