बेल्जियम और ईरान के बीच फीफा वर्ल्ड कप 2026 का मुकाबला ड्रॉ पर छूटा. ईरान ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए बेल्जियम की हर कोशिश को नाकाम कर दिया. बेल्जियम के खिलाड़ी ईरानी गोलकीपर अलीरेज़ा बेइरानवंद से ज़रूर घबरा गए होंगे. उन्होंने जितनी भी कोशिश की, वे अलीरेजा के लचीले और बेहद भरोसेमंद मजबूत हाथों को पार करके गोल नहीं कर पाए. वर्ल्ड कप के ग्रुप मैच के दौरान एक समय बेल्जियम के स्टार केविन डी ब्रुइन हैरान रह गए, जब ईरान के हीरो ने मैक्सिम डी कुइपर के ज़ोरदार शॉट को बहुत करीब से रोक लिया. डी कुइपर ने डिफ्लेक्शन से उनके पैरों के पास आई गेंद पर शॉट मारा, तो अलीरेजा फिसल गए थे और उनका संतुलन बिगड़ गया था. फिर भी ईरानी खिलाड़ी ने किसी तरह अपना बायां हाथ फैलाया और गेंद को खतरे से दूर धकेल दिया.
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आज हर कोई ईरानी खिलाड़ी की चर्चा का रहा है, मगर उनका यहां तक पहुंचने का सफर संघर्ष से भरा रहा. फ़ुटबॉलर बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने कई तरह के छोटे-मोटे काम किए हैं. ईरान के लोरेस्तान प्रांत में भेड़ चराने वाले एक खानाबदोश परिवार के सबसे बड़े बेटे अलीरेज़ा बेइरानवंद ने Varzesh3.com को बताया कि वह अपनी भेड़ों को चराते हुए एक गांव से दूसरे गांव जाते रहते थे और यह पक्का करते थे कि वे झुंड से अलग न हों या चोरी न हो जाएं.
पिता ने फाड़े ग्लव्स
खाली समय में वह फ़ुटबॉल और 'डाल परान' खेलते थे. इससे उन्हें बाद में फ़ुटबॉल में बॉल पास करने में मदद मिली. वह अपने पिता की नजरों से बचकर लगभग 12 साल की उम्र में वह एक लोकल क्लब में शामिल हो गए. वह स्ट्राइकर थे, लेकिन एक दिन जब दोनों रेगुलर गोलकीपर चोटिल हो गए, तो उन्हें गोलकीपर की भूमिका निभानी पड़ी, लेकिन एक दिन उनके पिता को पता चल गया कि वह छोटे भाई-बहनों पर जानवरों को चराने की ज़िम्मेदारी छोड़कर फ़ुटबॉल खेल रहे हैं. जिसके बाद गुस्से में उनके पिता ने उनके ग्लव्स फाड़ दिए और उनके पास दूसरे ग्लव्स खरीदने के लिए पैसे नहीं थे.
रात में घर से भागे
इसके बाद वह रात में तेहरान जाने वाली बस में बैठ गए. अपने कज़िन से कुछ पैसे उधार लिए और चुपके से भाग निकले. 600 किलोमीटर का सफर उनके लिए बहुत मुश्किल था और उनके पास बहुत कम पैसे थे. बस में उनकी मुलाक़ात एक लोकल टीम के कोच हुसैन फ़ैज से हुई. उन्होंने उन्हें अपने सपने के बारे में बताया, लेकिन कोच ने कुछ पैसे (टोकन मनी) की मांग की, क्योंकि क्लब का बजट बहुत कम था और वे हर किसी को मुफ़्त ट्रेनिंग नहीं दे सकते थे. फिर अपने रिश्तेदार से मिले पैसों से उहोंने पहले महीने की फीस भरी.
कार धोने का काम
तेहरान में उनका कोई रिश्तेदार या रहने की जगह नहीं थी. वे शाम को ट्रेनिंग करते थे और मस्जिदों में, कभी-कभी सड़कों पर सोते थे. एक बार तो किसी ने उन्हें भिखारी समझकर उन्हें सिक्के तक दे दिए. जिससे उन्होंने समय बाद बढ़िया नाश्ता किया था. फिर कोच ने क्लब के मालिकों से अलीरेजा को मुफ़्त में ट्रेनिंग करने और किसी सीनियर खिलाड़ी के साथ रहने देने के लिए कहा, लेकिन फिर भी उन्हें अपना गुज़ारा तो करना ही था. उनके रूममेट ने उन्हें कार धोने वाली एक फ़र्म से मिलवाया. फर्म के मालिक इसलिए उनसे खुश हो गए, क्योंक वह लंबे थे और बिना ज़्यादा जोर लगाए SUV धो सकते थे.
रात में सड़क की सफाई
कार धोने वाले का काम करने के बाद वह पिज्जा शॉप में वेटर बने. वह रात में सड़क की सफाई करने लगे, ताकि कोई देख न सके, लेकिन रात की शिफ्ट की वजह से उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ा और उन्हे खेलने के लिए कम समय मिलने लगा. फिर एक लोकल टीम नाफ़्टा की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने उहें U-23 टीम के साथ ट्रेनिंग करने के लिए कहा. इसके बाद तो उनका करियर चल पड़ा. उन्हें मैच खेलने के लिए पैसे मिलने लगे और वह ईरान की U-23 टीम में शामिल हो गए.
2015 में उन्होंने ईरान की टीम के लिए अपना पहला मैच खेला. इसके तीन साल बाद 2018 वर्ल्ड कप में उन्होंने क्रिस्टियानो रोनाल्डो की पेनल्टी किक रोककर खूब सुर्खियां बटोरीं. इस बीच वह घर लौटे और अपने पिता के साथ रिश्ते ठीक किए.
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