Jersey Controversy: हॉकी इंडिया के अध्यक्ष को बिना बताए लिया गया जर्सी का रंग केसर‍िया करने का फैसला, टिर्की ने मांगी सफाई

नेदरलैंड्स और बेल्जियम में 15 अगस्त से शुरू हो रहे विश्व कप से पहले भारतीय टीमों की जर्सी का रंग नीले से केसरिया कर दिया गया

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भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदल गया है. (PC: Getty)

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15 अगस्त से हॉकी वर्ल्ड कप शुरू हो रहा है.

भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदल गया है.

भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदलने का विवाद बढ़ता ही जा रहा है और अब हॉकी इंडिया अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने महासंघ के पदाधिकारियों से सफाई मांगी है कि उनकी और कार्यकारी बोर्ड की जानकारी या सहमति के बिना यह बड़ा फैसला कैसे लिया गया. हालांकि महासचिव भोलानाथ सिंह ने कहा कि सभी अधिकारियों को इस बदलाव की जानकारी थी. नेदरलैंड्स और बेल्जियम में 15 अगस्त से शुरू हो रहे विश्व कप से पहले भारतीय टीमों की जर्सी का रंग नीले से केसरिया कर दिया गया, जिसे लेकर वीरेन रसकिन्हा, परगट सिंह, वी भास्करन, धनराज पिल्लै जैसे पूर्व खिलाड़ियों ने सवाल उठाये हैं.  वहीं मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया और विपक्षी दलों ने इस पर सरकार को आड़े हाथों लिया है. 

भारत की जर्सी नीली से केसरिया करने पर हॉकी इंडिया ने दी सफाई, जानिए क्या कहा

टिर्की सहित हॉकी इंडिया के पदाधिकारियों का बीते दिन तक कहना था कि खेल के मैदान पर इस्तेमाल होने वाली नीली पिच से रंग की समानता से बचने के लिए यह पूरी तरह से तकनीकी निर्णय था, लेकिन अब टिर्की ने सुबह कार्यकारी बोर्ड को भेजे ईमेल में लिखा कि जर्सी का रंग बदलने का फैसला कार्यकारी बोर्ड के समक्ष रखने या उनकी पूर्व जानकारी के बिना लिया गया. टिर्की हॉकी इंडिया पदाधिकारियों से जवाब चाहते हैं कि उन्हें तुरंत लिखित में बताया जाये कि इस फैसले का आधार क्या था, किस प्रक्रिया का पालन किया गया और किन हालात में इस फैसले को मंजूरी दी गई और लागू किया गया.

 महासचिव का बयान
 

उन्होंने आगे लिखा कि ओडिशा सरकार ने उनसे इस मसले पर स्पष्टीकरण मांगा है लिहाजा उन्हें सही जवाब देने के लिये उनसे स्पष्टीकरण चाहिए. हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह ने कहा कि खिलाड़ियों से परामर्श के बाद उनकी मांगों को ही लागू किया है.उन्होंने पीटीआई भाषा से कहा कि जर्सी का रंग बदलने के फैसले के बारे में ग्रुप में जानकारी दी गई थी,इसीलिए सभी अधिकारियों को इसका पता होना चाहिए. उनका कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह इतना बड़ा मुद्दा बन जाएगा. रंग बदलने के लिए उन पर कहीं से भी कोई बाहरी दबाव नहीं था. इसे बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा है. 

जब उनसे पूछा गया कि क्या हॉकी इंडिया इस फैसले पर वापस से व‍िचार करेगा तो सिंह ने कहा कि अकेले फैसले नहीं ले सकता. आखिरकार यह खिलाड़ियों और कोचों की मांग थी और हमने उनकी बात मानी. टिर्की ने आगे लिखा यह मसला काफी सुर्खियों में आ गया है और कई हलकों में इसके राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं.वर्ल्ड  कप ज्यादा दूर नहीं है जिसकी वजह से उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा कि यह फैसला खेल से जुड़े कारणों से लिया गया ताकि टीम और उसकी तैयारियों पर फोकस रहे.उन्होंने लिखा कि उन्हें केसरिया रंग से कोई समस्या नहीं है. उनका कहना है कि  सिर्फ इतना है कि टीम की पहचान और प्रतिनिधित्व से जुड़ा फैसला चयनित पदाधिकारियों और कार्यकारी बोर्ड के समक्ष रखने के बाद लागू होना चाहिये.

सोर्स का कहना है कि टिर्की ने हॉकी इंडिया महानिदेशक को भी अलग से पत्र लिखकर 31 जुलाई तक स्पष्टीकरण मांगा है.सोर्स ने यह भी बताया कि मामले के तूल पकड़ने के बाद ओडिशा सरकार को 30 जुलाई को जर्सी का रंग बदले जाने के मामले में ईमेल भेजा गया है जबकि जर्सी 28 जुलाई को लांच की गई थी. 

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