एशियन गेम्स 2026 के आगाज में अब गिनती के ही दिन बचे हैं और ऐसे में सभी टीमें और देश मेडल जीतने के लिए अपनी तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते.इसी बीच कोरियन रेसलिंग फेडरेशन ने एशियन गेम्स में मेडल जीतने वाले अपने खिलाड़ियों को गिफ्ट में सूअर के मांस से बनी चीजें देने का ऐलान किया है.
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दरअसल इस ऐलान के पीछे वजह कोरियन पहलवानों को अच्छे प्रदर्शन और मेडल जीतने के लिए प्रोत्साहित करना है.हाल के सालों में साउथ कोरिया की कुश्ती का दौर मुश्किलों भरा रहा है.देश 2021 के टोक्यो ओलिंपिक में कोई भी मेडल नहीं जीत पाया. 1972 के बाद ऐसा पहली बार हुआ जब वे पोडियम तक नहीं पहुंच पाए और 2024 के अगले ओलिंपिक में भी कोई मेडल हासिल नहीं कर सका.2023 में चीन के हांगझोऊ में हुए एशियन गेम्स में साउथ कोरिया सिर्फ दो ब्रॉन्ज़ मेडल ही जीत पाया, जो पिछले 57 सालों में एशियाई खेलों में उसका सबसे खराब प्रदर्शन था.
अध्यक्ष ने उठाए अनोखे कदम
1992 के ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट और अब नेशनल टीम के कोच एन हान-बोंग ने अपने खिलाड़ियों से अगले महीने होने वाले आइची-नागोया एशियन गेम्स में कहानी बदलने की अपील करते हुए अपनी आंखों में आए आंसुओं को रोका. योनहाप न्यूज़ के अनुसार कोरिया रेसलिंग फेडरेशन के प्रेसिडेंट किम इक-होन ने एशियन गेम्स में जाने वाली अपनी मुश्किलों से जूझ रही रेसलिंग टीम को सहारा देने के लिए कुछ कड़े और अनोखे कदम उठाए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक फेडरेशन के अध्यक्ष ने ऐलान किया है कि अगर कोरियन रेसलर 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाले एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतते हैं तो उन्हें दो साल तक हर महीने पोर्क (सूअर के मांस) का एक गिफ़्ट-सेट दिया जाएगा. जबकि सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीतने वालों को एक साल तक हर महीने ये गिफ्ट मिलेंगे.
इक-होन साउथ कोरिया के ग्योंगसांगबुक-डो के सांगजू में स्थित 'सांकजुयाकगन' (Sankjuyakgan) नाम के पोर्क प्रोसेसिंग प्लांट के मालिक हैं.यह पेशकश तब की गई, जब एक कोच (जो खुद पूर्व ओलिंपिक चैंपियन रह चुके हैं) और कई पहलवान विदाई समारोह के दौरान भावुक हो गए.रेसलिंग में अक्सर होने वाली अव्यवस्था के कारण उनके मेडल जीतने की उम्मीदें धूमिल नज़र आ रही थीं.
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