31 जुलाई 2026 का वो दिन, जब ग्लास्गो में SEC सेंटर में वो हुआ, जिसकी भारतीय फैंस को भी शायद उतनी उम्मीद न थी. 23 साल के हर्ष सिंह महज 41 सेकेंड के अंदर भारत को जूडो इतिहास का दूसरा गोल्ड मेडल दिला दिया.वह कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने वाले भारत के पहले पुरुष जूडोका बन गए थे. देखते ही देखते हर्ष सिंह दुनिया के हर कोने में छा गए. उनके खेल की चारों तरफ चर्चा होने लगी. हर्ष की इस जीत को अभी पूरे एक महीना भी नहीं हुआ, वो गायब हो गए.
बड़े मौके का कर रहे थे इंतजार
हर्ष ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा भी कि वह इस बड़े मौके का इंतजार कर रहे थे, मगर नाम नहीं आया और ये देखकर उन्हें दुख होता है. दरअसल जूडो फेडरेशन ने सात पुरुषों और सात महिलाओं के नाम प्रस्तावित किए थे, लेकिन खेल मंत्रालय ने सिर्फ तीन खिलाड़ियों को मंजूरी दी.तीन महिलाओं को ही एशियन गेम्स के लिए मंजूरी मिली है.हर्ष सिंह के अलावा मेडलिस्ट उन्नति शर्मा उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्हें बाहर रखा गया है.
हर्ष सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज को हराकर गोल्ड मेडल जीता था. राउंड ऑफ 16 में 23 साल के हर्ष ने मलावी के चकोंडी काथेवेरा को इप्पोन से हराया. इसके बाद क्वार्टर फ़ाइनल में उन्होंने वानुअतु के एलन मोंथौएल को भी इप्पोन से हराया. सेमीफाइनल के कड़े मुकाबले में हर्ष ने ऑस्ट्रेलिया के पेड्रो कार्लोस एंटुन को वाज़ा-अरी से हराकर फाइनल में अपनी जगह पक्की की थी.




