एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट (AIU) के अधिकारी एशियन गेम्स की तैयारी कर रहे भारत के टॉप एथलीटों की रैंडम जांच कर रहे हैं. ऐसे में एक्सपर्ट्स को चिंता है कि अगर टॉप एथलीट हर्बल सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल करते हैं तो विदेशों में WADA से मान्यता प्राप्त लैब्स में परफॉर्मेंस बढ़ाने वाले पदार्थों के लिए सैंपल की जांच के दौरान 'एडवर्स एनालिटिकल फाइंडिंग्स' (AAF) यानी प्रतिबंधित पदार्थ मिलने का मामला सामने आ सकता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक नेशनल कैंप में ट्रेनिंग कर रहे एथलीटों के बीच हर्बल सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल काफी आम है.
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टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार एक्सपर्ट का कहना है कि एथलीट जिन सप्लीमेंट्स का आम तौर पर इस्तेमाल करते हैं, उनमें कीड़ा जड़ी-बूटी, भस्म, अश्वगंधा और शिलाजीत शामिल हैं. इनमें कीड़ा जड़ी (कॉर्डिसेप्स साइनेंसिस) सबसे महंगी है, जिसकी कीमत 16-20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम है. इसे शहद के साथ मिलाकर लिया जाता है. भारत में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कीड़ा जड़ी की कीमत 100 ग्राम के लिए लगभग 1.66 लाख रुपये है. उनका कहना है कि कई एथलीट अपनी बचत का इस्तेमाल करके कीड़ा जड़ी खरीदते हैं और नियमित रूप से इसका सेवन करते हैं. हर्बल सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल करने वाले एथलीटों के लिए AAF का जोखिम होता है, क्योंकि इनमें से कई प्रोडक्ट्स में मौजूद सामग्री की जांच नहीं की जाती है. एक महीने के कोर्स के लिए उन्हें लगभग एक लाख रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं.
हिमालय में मिलने वाली फंगस
उन्होंने कहा कि भारत के कई स्प्रिंटर्स, थ्रोअर्स और मिडिल-डिस्टेंस रनर्स ये सप्लीमेंट्स ले रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ज़्यादातर एथलीट अपने द्वारा लिए जाने वाले सप्लीमेंट्स की लिस्ट बताते समय हर्बल सप्लीमेंट्स के इस्तेमाल का जिक्र नहीं करते हैं. कीड़ा जड़ी हिमालय में मिलने वाली एक तरह की फंगस है. भारतीय एथलीट कई सालों से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं और अब तक किसी का भी टेस्ट पॉजिटिव नहीं आया है.हालांकि हाल में ऐसी चिंताएं जताई गई हैं कि कुछ प्रोडक्ट्स में WADA की प्रतिबंधित लिस्ट में शामिल चीजें हो सकती हैं, लेकिन अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है. एक्सपर्ट्स ने कहा कि हो सकता है कि इन मेटाबोलाइट्स की वजह से NADA टेस्ट में रिजल्ट पॉज़िटिव न आया हो, लेकिन AIU के एडवांस्ड टेस्ट में नतीजा अलग हो सकता है, जिससे एथलीट्स के लिए AAF का रिस्क बढ़ सकता है.
भारतीय एथलीटों की रैंडम टेस्टिंग
जब स्थानीय स्तर पर मिलने वाले हर्बल सप्लीमेंट्स के इस्तेमाल के बारे में पूछा गया तो पेरिस ओलिंपिक में भारतीय दल की न्यूट्रिशनिस्ट रहीं मिहिरा खोपकर ने इससे जुड़े खतरों की पुष्टि की.उ न्होंने बताया कि एलीट स्पोर्ट्स में यह बहुत जरूरी है कि बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले एथलीट्स ऐसे सप्लीमेंट्स चुनें जो न सिर्फ सबूतों पर आधारित हों, बल्कि थर्ड-पार्टी द्वारा टेस्ट किए गए हों. सोर्स का कहना है कि AIU ने WADA की तरफ से उन टॉप भारतीय एथलीटों की टारगेटेड टेस्टिंग की है, जो एशियन गेम्स में हिस्सा लेंगे. अधिकारियों ने बेंगलुरु, भुवनेश्वर और पटियाला में टीम के ज़्यादातर एथलीटों का टेस्ट किया है. यह पहली बार है जब किसी बड़े टूर्नामेंट से पहले भारतीय एथलीटों की इतने बड़े पैमाने पर रैंडम टेस्टिंग की गई है.
इस साल जुलाई में AIU की डोपिंग उल्लंघन करने वालों की लिस्ट में भारत 162 नामों के साथ सबसे ऊपर रहा.इसके बाद केन्या (148) और रूस (60) का नंबर था. AIU ने एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) को कैटेगरी B से कैटेगरी A में भी बदल दिया.
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