BWF World Championships के लिए नौकरी पर रखे गए लंगूर की तरह आवाज निकालने वाले कलाकार

इस साल इंडिया ओपन के दौरान स्टेडियम में एक बंदर देखा गया. स्टेडियम में तीन मंजिलें हैं और हर मंजिल पर एक-एक दरवाज़ा है.

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द‍िल्ली 17 से 23 अगस्त के बीच बैडमिंटन वर्ल्ड चैंप‍ियनश‍िप की मेजबानी करेगा. (PC: Getty)

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द‍िल्ली 17 से 23 अगस्त के बीच बैडमिंटन वर्ल्ड चैंप‍ियनश‍िप की मेजबानी करेगा.

चैंप‍ियनश‍िप के लिए लंगूर की तरह आवाज निकालने वाले चार लोगों को काम पर रखा गया.

इंडिया ओपन में ख‍िलाड़ी कबूतर, बंदर से काफी परेशान थे. उस टूर्नामेंट में मिला अनुभव अब बहुत काम आ रहा है. द‍िल्ली में होने वाले BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए इन सब परेशान‍ियों से बचने लिए कई तरह के उपाय किए जा रहे हैं. पक्षियों को दूर भगाने के लिए आवाज निकालने वाली USA की एक खास मशीन, कबूतरों को दूर रखने वाला बिना जहर वाला चिकना जेल और बंदरों को अंदर आने से रोकने के लिए अपने-आप बंद होने वाले डबल दरवाजों का इस्तेमाल किया जाएगा. इतना ही नहीं, बंदरों को भगाने के लिए लंगूर की तरह आवाज निकालने वाले कलाकारों को भी नौकरी पर रखा गया है. 

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दरअसल दिल्ली में लंबे समय से ट्रेंड लोग बंदरों को भगाने का काम कर रहे हैं, क्योंकि वाइल्डलाइफ कानून के तहत बंदरों को भगाने के लिए लंगूरों का इस्तेमाल करना मना है.यह पेशा हिंदी फ़िल्म 'ईब अले ऊ!' (Eeb Allay Ooo!) का विषय था.यह नाम बंदरों को भगाने के लिए निकाली जाने वाली खास आवाजों पर रखा गया है. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए IG इंडोर स्टेडियम में भी ऐसा ही करने के लिए चार लोगों को काम पर रखा गया है. 

इंडिया ओपन से सबक 

उन चार लोगों में से एक जब्बार का कहना है कि यह हुनर उनके परिवार में पीढ़ियों से चला आ रहा है.उन्हें अक्सर राजधानी के नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक में उस खास और मुश्किल काम के लिए टेंडर के जरिए बुलाया जाता है और वे बताते हैं कि इस काम से वे महीने में लगभग 25 हजार रुपये कमा लेते हैं. 


आयोजकों को लंगूर की तरह आवाज निकालने वाले लोगों की जरूरत उस घटना के बाद महसूस हुई, जब इस साल इंडिया ओपन के दौरान स्टेडियम में एक बंदर देखा गया. स्टेडियम में तीन मंजिलें हैं और हर मंजिल पर एक-एक दरवाज़ा है.स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के रीजनल एग्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर अंबर प्रताप सिंह का कहना है कि जब भी कोई दरवाजा खुला रह जाता था, तो कोई भी यह पक्का नहीं कर पाता था कि बंदर अंदर न आएं. 
 

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