भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड जीतने से चूक गए.उन्हें सिल्वर से संतोष करना पड़ा.इवेंट के बाद नीरज ने माना कि ग्लासगो में जब भी वे रनवे पर कदम रखते थे तो उन्हें डर लगता था, लेकिन ओलिंपिक चैंपियन ने चोट की चिंताओं को पीछे छोड़ते हुए शुक्रवार को कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की जैवलिन थ्रो स्पर्धा में सिल्वर मेडल हासिल कर पोडियम पर वापसी की.लगभग एक साल में पहली बार नीरज किसी बड़े टूर्नामेंट से मेडल जीतकर लौटे. हालांकि फाइनल में नीरज अपने पुराने में अंदाज में नजर नहीं आए, लेकिन चोटों से जूझते हुए 18 महीनों के बाद यह नतीजा स्कोरबोर्ड पर दर्ज दूरी से कहीं ज़्यादा मायने रखता था.
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डर पर हासिल की जीत
28 साल के नीरज ने शाम के अपने दूसरे थ्रो में 85.83 मीटर का अपना बेस्ट प्रदर्शन किया और सिल्वर मेडल अपने नाम किया. श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने 89.75 मीटर के शानदार थ्रो के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम किया.वहीं भारत के ही यश वीर सिंह ने अपने आखिरी प्रयास में 85.41 मीटर का शानदार पर्सनल बेस्ट प्रदर्शन करते हुए ब्रॉनज़ मेडल जीता, जिससे भारत को पोडियम पर दो स्थान मिले. हालांकि नीरज के लिए मेडल सेरेमनी से बहुत पहले ही एक बड़ी जीत मिल चुकी थी. बार-बार होने वाली चोटों, खासकर कमर के निचले हिस्से की समस्या ने, जो उन्हें पिछले सितंबर से परेशान कर रही थी,उनसे वह आत्मविश्वास छीन लिया था जो कभी उनके खेलने के अंदाज की पहचान हुआ करता था. जून में दोहा डायमंड लीग में कॉम्पिटिशन में वापसी करने के बाद भी नीरज ने माना कि वह महीनों तक खेल से दूर रहने के कारण हुए मानसिक तनाव से अब भी जूझ रहे थे.
वापस चोटिल होने को लेकर डरे हुए थे नीरज
इवेंट के बाद नीरज ने कहा कि उनकी वापसी अच्छी चल रही है.उन्हें ठंड में ज़्यादा अच्छा नहीं लगता, आखिरकार वह भारतीय हैं.पोडियम पर वापसी करके अच्छा लग रहा है. उन्होंने कहा कि उन्होंने जो मेहनत की है, उसका नतीजा उन्हें धीरे-धीरे मिल रहा है. नीरज ने बताया कि ग्लास्गो में सबसे बड़ी चुनौती ठंड या तेज हवा नहीं थी, बल्कि दोबारा चोट लगने के डर पर काबू पाना था. उन्होंने बताया कि वह अगली प्रतियोगिताओं में बेहतर थ्रो करने की कोशिश करेंगे. उन्हें लगता है कि मुख्य अंतर यह है कि अगर आप 100 प्रतिशत फिट हैं, तो आपमें लड़ने का जज़्बा होता है कि आप किसी भी चीज़ से पार पा लेंगे, लेकिन चोट लगने पर सोचने लगते हैं.डर जाते हैं. नीरज ने बताया कि वह भी डरा हुए थे. वह बहुत जोर से नहीं दौड़ना चाहते थे. अपने शरीर को नियंत्रण में रखना चाहते थे.
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