ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय सेना के जवान गुलवीर सिंह ने कमाल कर दिया. गरीबी को चुनौती देने के लिए गुलवीर ने सिर्फ दौड़ को ही चुना. किसान परिवार से होने के नाते गुलवीर अपने आर्थिक संकट से उबरना चाहते थे और उन्होंने फौज में नौकरी पाने का रास्ता सिर्फ दौड़ को ही चुना. इसके चलते उन्होंने दौड़ के दम पर सेना में नौकरी तो पा ली, लेकिन उसका असली मतलब आर्मी में आने के बाद समझा. गुलवीर ने नायब सूबेदार बनने के बाद आर्मी स्पोर्ट्स में अपना जलवा दिखाया और देखते ही देखते उसी दौड़ का मतलब बदल गया. अब देश की शान बढ़ाते हुए उन्होंने भारत को 10 हजार मीटर यानी 10 किलोमीटर (मेंस) की दौड़ में कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास का पहला मेडल दिलाया. यही कारण है कि गुलवीर अब हीरो बन चुके हैं. आइए जानते हैं कि कैसे उन्होंने गरीबी से ग्लासगो तक का सफर तय किया.
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गुलवीर सिंह ने रचा इतिहास
गुलवीर सिंह ने भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पहली बार 10,000 मीटर की रेस में मेडल अपने नाम किया. गुलवीर ने 10,000 मीटर की दौड़ 27:49.78 मिनट के समय के साथ पूरी की. इसके चलते उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया और देश को भारतीय मेंस एथलेटिक्स में इन गेम्स का पहला मेडल दिलाया. अभी तक 10,000 मीटर की स्पर्धा में भारत की कविता ने साल 2010 में कांस्य पदक जीता था. इस तरह मेंस एथलेटिक्स में पहली बार मेडल दिलाने वाले गुलवीर सिंह का नाम अब इतिहास में दर्ज हो गया है.
गुलवीर ने सिर्फ आर्मी भर्ती के लिए चुनी थी 'दौड़'
भारत की शान और सेना के जवान गुलवीर की बात करें तो उनका जन्म अलीगढ़ जिले के सिरसा गांव में हुआ था. गुलवीर के पिता किसान थे और उनके पास खेती करने के लिए बहुत अधिक जमीन नहीं थी. इसके चलते परिवार को आर्थिक संकट से भी जूझना पड़ा. इस बीच गुलवीर ने दौड़ को ही गले लगाया और सबसे पहले इसे आर्मी में नौकरी पाकर घर को सहारा देने का साधन माना. गुलवीर ने दौड़ के जरिए पहले सेना में नौकरी पाई और उसके बाद आर्मी स्पोर्ट्स के जरिए इसे अपने करियर के रूप में अपनाया.
साल 2018 में आर्मी में नौकरी पाने के बाद गुलवीर ने आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट और बाद में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के राष्ट्रीय कैंप में हिस्सा लिया. गुलवीर की पोस्टिंग अरुणाचल प्रदेश जैसे कठिन इलाकों में हुई. वहां भी ड्यूटी करने के बाद उन्होंने दौड़ना जारी रखा और कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा.
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सेना में आने के बाद अमेरिका से भी ट्रेनिंग लेकर आए गुलवीर
सेना में आने के बाद चार साल तक गुलवीर ने कड़ा अभ्यास करके खुद को प्रोफेशनल रनिंग के लायक बनाया और साल 2022 के फेडरेशन कप में 10,000 मीटर दौड़ का पहला कांस्य पदक अपने नाम किया. यहीं से गुलवीर आगे बढ़ते चले गए और उन्होंने 2024 में अमेरिका के कोलोराडो स्प्रिंग्स में भी ट्रेनिंग ली.
इस ट्रेनिंग के बाद गुलवीर ने 3000 मीटर, 5000 मीटर और 10,000 मीटर में लगातार राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़े और 2025 में एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5000 और 10,000 मीटर में गोल्ड मेडल हासिल किया. लगातार मेडल जीतने का सिलसिला गुलवीर ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भी जारी रखा और देश को 10,000 मीटर का पहला सिल्वर मेडल दिलाकर इतिहास रच दिया. इस तरह कभी रोजी-रोटी के लिए दौड़ने वाले गुलवीर अब देश के लिए दौड़कर तिरंगे का मान बढ़ा रहे हैं.
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