डोला बनर्जी ने सबसे पहले साल 2007 में दुबई में हुए आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल में भारतीय रिकर्व आर्चरी का परचम लहराया था. उसके 19 साल बाद धीरज बोम्मादेवरा ने मैक्सिको में वही कारनामा दोहराया है. वह वर्ल्ड कप जीतने वाले ओवरऑल भारत के दूसरे रिकर्व आर्चर और पहले पुरुष भारतीय रिकर्व आर्चर है. साल्टिलो में हुए फाइनल में 5-5 से टाई होने के बाद विजयवाड़ा के इस तीरंदाज ने शूट-ऑफ में जापान के जुन्या नाकानिशी को 10-9 से हराया. इस तरह बोम्मादेवरा वर्ल्ड कप फाइनल का ख़िताब जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज बन गए हैं.
ADVERTISEMENT
WTC में पाकिस्तान की हालत खराब तो बाबर आजम सात साल बाद घरेलू क्रिकेट में लौटे
अंताल्या में इंडिविजुअल रिकर्व वर्ल्ड कप स्टेज 3 का गोल्ड मेडल जीतने वाले 25 साल के इस खिलाड़ी ने वर्ल्ड कप फाइनल के लिए दूसरे सीड के तौर पर क्वालिफ़ाई किया. उन्होंने क्वार्टर फ़ाइनल और सेमीफाइनल में पेरिस ओलिंपिक के ब्रॉन्ज मेडलिस्ट बर्किम ट्यूमर और दो बार के ओलिंपिक सिल्वर मेडलिस्ट जीन-चार्ल्स वलाडोंट को हराया और फिर फाइनल में शूट-ऑफ के जरिए जीत हासिल की.
खुद से आखिरी तीर तक लड़ने का वादा
बोम्मादेवरा ने वर्ल्ड आर्चरी से कहा कि मैच की शुरुआत से लेकर आखिर तक मैंने एक बात ध्यान में रखी कि मुझे आखिरी तीर तक लड़ना था, मैंने लड़ाई लड़ी और मुझे बहुत गर्व है. मैंने वह हासिल कर लिया, जिसके लिए मैंने इतनी कड़ी मेहनत की थी और भविष्य में भी मैं ऐसा ही करता रहूंगा. उन्होंने आगे कहा कि यह किसी सपने के सच होने जैसा है. हर एथलीट का यही सपना होता है कि वर्ल्ड कप फाइनल, एशियन गेम्स या ओलिंपिक्स जैसे इवेंट्स में चैंपियन बनना और देश का तिरंगा लहराना.इससे बहुत खुशी मिलती है.पेरिस ओलिंपिक्स में इंडिविजुअल कैटेगरी में बहुत करीबी अंतर से दूसरे राउंड में हारने और अंकिता भकत के साथ मिक्स्ड टीम इवेंट में चौथे स्थान पर रहने के बाद पिछले साल बोम्मादेवरा के फ़ॉर्म में गिरावट आई. उनका शूटिंग औसत करियर के सबसे अच्छे 9.51 से गिरकर 9.37 हो गया था.
ADVERTISEMENT











