जैवलिन थ्रो में भारत के रोहित यादव का शानदार सफर जारी रहा और वे देश के अब तक के दूसरे सबसे अच्छे थ्रोअर बन गए. भुवनेश्वर में कॉन्टिनेंटल टूर सिल्वर मीट में रोहित ने 87.68 मीटर का जबरदस्त थ्रो किया और भारतीय खिलाड़ियों की ऑल-टाइम लिस्ट में किशोर जेना से आगे निकल गए. जेना 2023 में 87.54 मीटर के थ्रो के साथ दूसरे स्थान पर थे. रोहित डबल ओलिंपिक मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा के बाद इतिहास के दूसरे बेस्ट भारतीय थ्रोअर बन गए हैं. नीरज 2025 में दोहा डायमंड लीग में बनाए गए 90.23 मीटर के अपने नेशनल रिकॉर्ड के साथ टॉप पर मज़बूती से बने हुए हैं.
ADVERTISEMENT
Asian Games: 492 भारतीय खिलाड़ियों पर लगी मुहर, जानिए किस खेल में कितने एथलीट
भारतीय एथलीटों का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
- नीरज चोपड़ा – 90.23 मीटर
- रोहित यादव – 87.68 मीटर
- किशोर जेना – 87.54 मीटर
- सचिन यादव – 86.27 मीटर
- शिवपाल सिंह – 86.23 मीटर
- यशवीर सिंह – 85.41 मीटर
एशिया के तीसरे बेस्ट थ्रोअर
87.68 मीटर के इस थ्रो ने रोहित के शानदार सफर में एक और उपलब्धि जोड़ दी. वे इस साल की शुरुआत में ही भारत की ऑल-टाइम लिस्ट में टॉप तीन में जगह बना चुके थे. जून में उन्होंने 87.05 मीटर दूर भाला फेंका था, जिससे वे कई जाने-माने खिलाड़ियों से आगे निकल गए और देश के बेहतरीन जैवलिन थ्रोअर्स में से एक के तौर पर अपनी पहचान बनाई. उनके हालिया थ्रो ने उन्हें एशियाई एथलीटों की अब तक की लिस्ट में छठे और इस सीजन में दुनिया में चौथे स्थान पर पहुंचा दिया है. साथ ही वह इस साल एशिया के तीसरे सबसे अच्छे थ्रोअर भी बन गए हैं. रोहित का यह शानदार प्रदर्शन इस साल की शुरुआत में कॉमनवेल्थ गेम्स में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद आया है. वह फाइनल में पहुंचे थे,लेकिन वह सिर्फ 81.56 मीटर की दूरी ही तय कर पाए थे.
चोट के बाद थ्रो बेहतर
रोहित ने भुवनेश्वर ने अपनी पिछली गलती सुधारी. हालांकि यह सब आसान नहीं था. इवेंट में आखिरी थ्रो से पहले रोहित दूसरे स्थान पर थे. दिन में हुई बारिश की वजह से ट्रैक फिसलन भरा था और रोहित अपने पैरों को बहुत सावधानी से जमा रहे थे, क्योंकि उन्हें पता था कि यहां फिसलने का मतलब एशियन गेम्स से बाहर होना हो सकता है. वे फिसल भी गए. अपनी दूसरी कोशिश में रोहित गिर पड़े, जिससे उनके घुटने में चोट लग गई, लेकिन वहीं से बदलाव की शुरुआत हुई.लगातार दो फाउल के बाद पहला थ्रो सिर्फ़ 75.92 मीटर का था, लेकिन उसके बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया. गिरने के बाद उनका हर थ्रो बड़ा होता गय और अगला थ्रो ज़्यादा इरादे से फेंका गया.रोहित ने अपने आखिरी प्रयास में पूरी जान लगा दी. जिसका नतीजा यह निकला कि उन्होंने अपने करियर का सबसे लंबा थ्रो किया और खास मुकाम हासिल किया.
ADVERTISEMENT











